बिजनौर: बिजनौर उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण लोकसभा संसदीय सीटों में से एक है। बिजनौर संसदीय क्षेत्र में सियासी बिसात बिछ गई है और में चुनावी चर्चा गरम है। भाजपा, कांग्रेस और गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। जनता को लुभाने के लिए सभी दलों के नेता सक्रिय हैं। वर्तमान में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। इस बार बसपा, सपा और रालोद के गठबंधन से बीजेपी के लिए जीत की राह आसान नहीं रहने वाली है। बीजेपी ने वर्तमान सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। जबकि कांग्रेस ने जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को टिकट दिया है। वहीं, महागबंधन के तहत बसपा ने मलूक नागर को प्रत्याशी बनाया है।

बिजनौर लोकसभा सीट से कई राजनीतिक दिग्गज अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती व लोक जनशक्ति पार्टी के राम विलास पासवान भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा ने यहां से चुनाव लड़ा था। मोदी लहर का असर इस सीट पर भी देखने को मिला था और भारतीय जनता पार्टी ने यहां जीत दर्ज की थी। बीजेपी के कुंवर भारतेंद्र सिंह ने यहां 2014 में 2 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी।

बिजनौन सीट का इतिहास

बिजनौर लोकसभा सीट का इतिहास बेहद दिलचस्प है। शुरुआत में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा था। देश में हुए पहले चुनाव यानी 1952 से लेकर 1971 तक ये सीट कांग्रेस के खाते में ही रही। इमरजेंसी के दौर के बाद कांग्रेस से लोगों का मोहभंग हुआ तो 1977 और 1980 में इस सीट पर जनता दल ने जीत हासिल की। 1984 में गिरधारी लाल, 1985 उपचुनाव में पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार यहां से चुनाव जीती थीं। इस चुनाव में उनके खिलाफ रामविलास पासवान और मायावती मैदान में थे।

1989 में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने जीत इस सीट पर परचम लहराया था। 1989 के बाद इस सीट पर कुल 7 चुनाव में चार बार भारतीय जनता पार्टी, दो बार राष्ट्रीय लोकदल और एक बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है।

ये है समीकरण

बिजनौर लोकसभा सीट पर कुल 15 लाख से अधिक वोटर हैं, जिनमें 848606 पुरुष और 713459 महिला वोटर हैं। 2014 में इस सीट पर 67.9 फीसदी वोट डाले गए थे, इनमें से 5775 वोट NOTA पर पड़े थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, बिजनौर में कुल 55.18 % हिंदू और 44.04% मुस्लिम जनसंख्या है। बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें दो बिजनौर जिले, दो मुजफ्फरनगर जिले और एक मेरठ जिले से आती हैं। ये सीटें पुरकाजी, मीरापुर, बिजनौर, चांदपुर और हस्तिनापुर हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सभी सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं।

मोदी लहर का दिखा असर

2014 में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में प्रचंड जीत हासिल की थी। बिजनौर में भी ऐसा ही हुआ। भारतेंद्र ने अपने प्रतिद्वंदी शाहनवाज राणा को 2 लाख से अधिक वोटों से मात दी। शाहनवाज राणा समाजवादी पार्टी की ओर से मैदान में थे। यहां बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मलूक नागर तीसरे नंबर पर रहे थे। राष्ट्रीय लोकदल की ओर से जयाप्रदा यहां पर कोई ज्यादा असर नहीं दिखा पाईं। जयाप्रदा को सिर्फ 24,348 वोट मिले थे जो कि कुल वोटों का 2 फीसदी ही था।

2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे

कुंवर भारतेंद्र सिंह- भारतीय जनता पार्टी- कुल वोट मिले- 486913- 45.9%

शाहनवाज राणा- समाजवादी पार्टी- कुल वोट मिले-281136- 26.5%

मलूक नागर- बहुजन समाज पार्टी- कुल वोट मिले- 230124- 21.7%

जयाप्रदा- राष्ट्रीय लोकदल- कुल वोट मिले- 23348- 2.3%

कौन हैं कुंवर भारतेंद्र सिंह

2014 में भाजपा ने जब बिजनौर से भारतेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया था तो हर कोई हैरान था। प्रदेश की राजनीति में उनका नाम नया नहीं था। भारतेंद्र सिंह दो बार विधायक रह चुके हैं।

कड़े मुकाबले की उम्‍मीद

2014 के लोकसभा चुनावों में सपा और बपसा के उम्‍मीदवार सरे और तीसरे नंबर पर रहे थे। लेकिन इस बार दोनों के बीच गठजोड़ हो गया है। 2014 में चौथे नंबर पर रही आरएलडी भी एसपी-बीएसपी महागठबंधन का हिस्‍सा है। ऐसे में बिजनौर लोकसभा सीट पर बीजेपी को कड़ी टक्‍कर मिलने की उम्‍मीद है।

प्रमुख मुद्दे

- चीनी मिलों से बकाया भुगतान

- गंगा के बाढ़ से बचाव को स्थायी समाथान नहीं

- रोजगार के साधन नहीं, सरकारी कारखाने खोले जाएं

- स्वीकृत केंद्रीय विद्यालवयों को बजट नहीं मिला