मुजफ्फरनगर: राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मुजफ्फरनगर सीट से सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस सीट से बीजेपी ने संजीव बालियान को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने इस सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है। शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया ने इस सीट से ओमबीर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है।
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीटों में से एक है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 'जाटलैंड' के नाम से मशहूर ये क्षेत्र अभी भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में है। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में यहां दंगे हुए। दंगों की वजह से इस सीट के सियासी समीकरण ही बदल गए। भाजपा की तरफ से संजीव बालियान ने इस सीट पर 2014 में बड़ी जीत दर्ज की थी। फिलहाल 2019 में यह सीट भाजपा के लिए आसान नहीं होगी।
मुजफ्फरनगर सीट का बैकग्राउंड
शुरुआती में इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा। 1952 के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 1962 तक ये सीट कांग्रेस के खाते में ही रही, जिसके बाद लगातार दो बार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने जीत दर्ज की थी। 1977 से 1991 तक ये सीट जनता दल, कांग्रेस के खाते में ही रही।
1990 के दौर में जब देश में राम मंदिर का मुद्दा चरम पर था तो उसका असर यहां भी देखने को मिला। 1991, 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में यहां पर लगातार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। 1999 में कांग्रेस ने फिर जीत दर्ज की लेकिन 2004 और 2009 में ये सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई। 2014 में चली मोदी लहर ने इस सीट को दोबारा भाजपा की झोली में डाल दिया।
ये है समीकरण
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर करीब 16 लाख वोटर्स हैं। इनमें पुरुष वोटर 875186 और 713297 महिला वोटर हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 69.7 फीसदी वोट पड़े थे। 2014 में इस सीट पर NOTA को 4739 वोट गए थे। इस सीट पर 27 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं।
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत कुल पांच विधानसभाएं आती हैं। ये बुढ़ाना, चरथावल, मुजफ्फरनगर, खतौली, सरधना सीटें हैं। ये पांचों सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में हैं। इनमें सरधना सीट से संगीत सोम विधायक हैं।
2014 में ये था नतीजा
2014 में उत्तर प्रदेश में चली भारतीय जनता पार्टी की लहर का असर मुजफ्फरनगर में भी देखने को मिला था। संजीव बालियान ने इस सीट पर करीब 60 फीसदी वोट हासिल किए थे, जबकि उनके प्रतिद्वंदी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार कादिर राणा को सिर्फ 22 फीसदी वोट ही मिले थे। संजीव बालियान ने कादिर राणा को करीब 4 लाख वोटों से हराया था।
संजीव बालियान- भारतीय जनता पार्टी- कुल वोट मिले- 653391- 59 प्रतिशत
कादिर राणा- बहुजन समाज पार्टी- कुल वोट मिले- 252241- 22.8 प्रतिशत
वीरेंद्र सिंह- समाजवादी पार्टी- कुल वोट मिले- 160810- 14.5 प्रतिशत
कौन हैं संजीव बालियान
संजीव बालियान ने 2013 में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं थीं, जब उनका नाम मुजफ्फरनगर दंगों में आया था, उनपर दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप था। बालियान पर आरोप था कि सितंबर 2013 में उन्होंने एक महापंचायत की थी, जिसके कारण इलाके में माहौल बिगड़ा था। बालियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े जाट नेता हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने नाराज जाटों को मनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
प्रमुख मुद्दे
छेड़छाड़, सांप्रदायिक तनाव, अपराध मेरठ-मुजफ्फरनगर रेलमार्ग का दोहरीकरण पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल राजमार्ग निर्माण बकाया गन्ना भुगतान, बिजली की बढ़ी दरें
