गोरखपुर, एबीपी गंगा। सियासत में एक जुमला बेहद फेमस है कि दिल्‍ली की सत्‍ता का रास्‍ता यूपी से होकर ही जाता है। लेकिन, एक बात जो राजनीतिक पार्टियों के गुणा-गणित को फेल कर देती है, वो यहां की जातिगत राजनीति है। प्रत्‍याशी चाहे बड़ा राजनेता हो और या फिर बॉलीवुड या भोजपुरी जगत का कलाकार। जीत को लेकर दावा तो कोई नहीं कर सकता है।

बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक

भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्‍टार रवि किशन और दिनेश लाल निरहुआ 2019 के अग्निपथ में प्रमुख चेहरा बन गए हैं। भोजपुरी के ये दोनों स्टार इस बार चुनावी दंगल में उतरे हैं। भले ही भोजपुरी सिनेमा में दोनों कलाकारों का कद बड़ा हो लेकिन सियासत सिनेमा से अलग है यहां की चुनौतियां भी बड़ी हैं। इस सबके बीच सबसे अहम बात ये है कि जाति की राजनीति में दोनों कलाकर किस ‘चेहरे’ के साथ जनता के दिल पर राज कर सकेंगे।

जारी है मंथन

2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर छह चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है। सातवां चरण भी सियासी दलों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। अंतिम चरण के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रही हैं। गोरखपुर लोकसभा सीट से भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्‍टार रवि किशन चुनाव मैदान में है। इतना ही नहीं भोजपुरी जगत के सबसे चर्चित स्‍टार दिनेश लाल निरहुआ की किस्मत भी वोटरों ने मतपेटी में कैद कर दी है।

आसान नहीं होगा सफर

योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। गोरखनाथ मंदिर और योगी की मानी जाने वाली गोरखपुर सीट बीजेपी के हाथ से निकल जाना सभी के लिए हतप्रभ करने वाला रहा था। सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले निषाद पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डा. संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने साढ़े बाइस हजार वोटों के अंतर से भाजपा के उपेन्‍द्र दत्‍त शुक्‍ल को हरा दिया था। यही वो सियासी मोड़ था जिसके बाद यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ और ये साथ कब तक बना रहेगा ये 23 मई को नतीजे आने के बाद ही पता चल पाएगा।