UP News: उत्तर प्रदेश में अब जमीन की खरीद-फरोख्त हो या खतौनी की नकल निकालना, किसानों और आम नागरिकों को अब लेखपालों या तहसील के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत प्रदेश के भू-राजस्व ढांचे को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है. 2026 तक इस प्रक्रिया को और अधिक सटीक और सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

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डिजिटल कायाकल्प और बजट

सरकार ने भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण के लिए ₹121 करोड़ का बजट आवंटित किया है. इसमें से अब तक लगभग ₹46 करोड़ जारी किए जा चुके हैं. इस पहल का मुख्य उद्देश्य भूमि मानचित्रों (नक्शों), खसरा और खतौनी को एक क्लिक पर उपलब्ध कराना है. अब प्रदेश का 'भूलेख' पोर्टल रियल-टाइम डेटा अपडेट करता है, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई है.

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प्रमुख सुधार और तकनीक का उपयोग

1. QR कोड आधारित सत्यापन: अब संपत्ति के कागजात पर QR कोड होगा. इसे स्कैन करते ही संपत्ति का पुराना इतिहास, मालिकाना हक और विवादों की स्थिति तुरंत पता चल जाएगी.2. स्वामित्व योजना (SVAMITVA): ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए मैपिंग की जा रही है. अब तक लाखों ग्रामीणों को 'घरौनी' (प्रॉपर्टी कार्ड) दिए जा चुके हैं, जिससे वे अपनी संपत्ति पर बैंक लोन ले पा रहे हैं.3. धारा-80 का सरलीकरण: कृषि भूमि को गैर-कृषि (औद्योगिक या आवासीय) में बदलने की प्रक्रिया (धारा-80) अब ऑनलाइन और समयबद्ध हो गई है. 2026 तक इसे और अधिक स्वचालित करने का लक्ष्य है.4. यूनिक गाटा संख्या: हर जमीन के टुकड़े को एक विशिष्ट 16 अंकों का आईडी कोड दिया गया है, जिससे जमीन की पहचान में होने वाली गड़बड़ी पूरी तरह रुक गई है.

भ्रष्टाचार पर लगाम और निवेशकों को लाभ

भूमि रिकॉर्ड पारदर्शी होने से भू-माफियाओं पर अंकुश लगा है. विवादित भूमि की रजिस्ट्री अब सिस्टम ही ब्लॉक कर देता है. इसके अलावा, औद्योगिक निवेश के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया तेज होने से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में यूपी की रैंकिंग सुधरी है. अब नामांतरण (Mutation) के लिए भी ऑनलाइन आवेदन की सुविधा है, जो पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है.