'अखिलेश यादव को कांशीराम नहीं मोइनुद्दीन पसंद', सपा मुखिया के लिए किसने कही ये बात?
UP News: अम्बेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही दलित वोट हासिल करने के लिए SP प्रमुख कांशीराम जी की जयंती को PDA दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर रहे.

अम्बेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर दलित राजनीति को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, सपा प्रमुख को बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी की याद आने लगी है, लेकिन सत्ता में रहते हुए उनके प्रति सम्मान और प्रतिबद्धता दिखाई नहीं देती.
डॉ. निर्मल ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने कांशीराम जी के नाम से जुड़े कई महत्वपूर्ण संस्थानों और स्थलों के नाम बदल दिए. उन्होंने कहा कि कांशीराम जी के नाम से स्थापित जिले, मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी तक का नाम बदल दिया गया.
अम्बेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष का सपा पर हमला
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने कांशीराम जी के नाम से बने अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय कर दिया. इसी प्रकार सहारनपुर मेडिकल कॉलेज, जो पहले कांशीराम मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता था, उसका नाम बदलकर महमूदुल हसन नदवी के नाम पर कर दिया गया. इतना ही नहीं, मान्यवर कांशीराम नगर का नाम भी बदलकर कासगंज कर दिया गया.
अखिलेश सरकार के दौरान दलित समाज उपेक्षित रहा- डॉ. निर्मल
उन्होंने कहा कि अब चुनाव नजदीक आते ही दलित समाज के वोट हासिल करने के लिए सपा प्रमुख कांशीराम जी की जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर रहे हैं. सपा के इस तथाकथित पीडीए में अखिलेश सरकार के दौरान दलित समाज हमेशा उपेक्षित ही रहा है. डॉ. निर्मल ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में दलित अधिकारियों के साथ भी अन्याय हुआ. उस समय बदले की भावना से कई दलित अधिकारियों का डिमोशन किया गया, जिसके कारण एसडीएम स्तर के अधिकारियों को तहसीलदार बनकर काम करना पड़ा.
दलित समाज अब भ्रमित नहीं होने वाला- डॉ. निर्मल
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दलितों के प्रमोशन में आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को भी सपा सरकार ने स्वतः संज्ञान लेकर समाप्त करने का प्रयास किया. सपा की राजनीति में दलितों का सम्मान और अधिकारों की जगह केवल वोट बैंक की चिंता दिखाई देती है. सत्ता में रहते समय जहां दलितों की उपेक्षा की गई, वहीं चुनाव आते ही उन्हें याद करना केवल राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण है. डॉ. निर्मल ने कहा कि दलित समाज अब राजनीतिक दिखावे और अवसरवादी राजनीति को समझ चुका है और वह ऐसे किसी भी प्रयास से भ्रमित नहीं होगा.
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Source: IOCL


























