उत्तराखंड के कोटद्वार में हाल के दिनों में सामने आए विवाद को लेकर अब कई नई परतें खुलने लगी हैं. मोहम्मद दीपक के नाम से चर्चित दीपक कश्यप को लेकर यह तथ्य सामने आया है कि वह लंबे समय से कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं. उनके सोशल मीडिया (फेसबुक) पर कई ऐसी पोस्ट मौजूद हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री के खिलाफ उन्होंने तीखी टिप्पणियां की है. इन तथ्यों के सामने आने के बाद यह मामला अब कानून-व्यवस्था से अधिक राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है.

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'कांग्रेस जानबूझकर प्रदेश का माहौल कर रही है खराब'

भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस इस पूरे प्रकरण को जानबूझकर तूल देकर प्रदेश का सामाजिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस लगातार ऐसे संवेदनशील मुद्दों को हवा देकर समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही है, ताकि इसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके. आरोप है कि इस तरह की राजनीति के जरिए कांग्रेस अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की नाकाम कोशिश कर रही है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कोटद्वार में एक मुस्लिम व्यक्ति की दुकान के नाम को लेकर हिंदू वादी संगठनों और दीपक नाम के व्यक्ति के बीच कहासुनी हुई थी. यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और स्थिति यहां तक पहुंच गई कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू वादी संगठनों के लोग कोटद्वार पहुंचने लगें. इससे क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया.

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'पुलिस दीपक को फंसाने की कर रही है कोशिश'- विपक्ष 

इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुलिस दीपक को फंसाने की कोशिश कर रही है. हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि दोनों पक्षों की ओर से मिली तहरीर के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस का कहना है कि फिलहाल न तो दीपक और न ही किसी अन्य व्यक्ति की गिरफ्तारी की गई है और मामले की निष्पक्ष जांच जारी है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के बाद यदि कोई भी व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है तो उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी. इसके बावजूद जिस तरह से सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर पुलिस और सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, उसे गंभीर और चिंताजनक बताया जा रहा है.

सरकार का कहना है कि कांग्रेस जानबूझकर ऐसे मुद्दों को उछालकर प्रदेश की शांति व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. आरोप है कि भोली-भाली जनता को भटकाकर 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार और पुलिस की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और जांच पूरी निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ेगी.