नई दिल्ली, एबीपी गंगा। निवेश करने वाले हमेशा एसएलआर के सिद्धांत का विशेष ध्यान रखते हैं। एसएलआर से मतलब सेफ्टी, लिक्विडिटी और रिटर्न से है। ऐसा माना जाता है एसएलआर के सिद्धांत पर निवेश करना हमेशा फायदेमंद साबित होता है। हमेशा मन में यही सवाल आता है कि बेहतर रिटर्न के लिए निवेश कहां किया जाए। लॉन्ग टर्म निवेश हमेशा से बेहतर विकल्प माना जाता रहा है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी स्कीम्स के बारे में जहां निवेश कर आप बेहतर रिटर्न पा सकते हैं।

पोस्ट ऑफिस स्कीम पोस्ट ऑफिस की कुछ स्कीम जैसे नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट 5 साल की मैच्योरिटी के साथ आती है। किसान विकास पत्र 9 साल 5 महीने में पूरी होती है। वहीं सुकन्या समृद्धि लड़की के 18 से 21 साल की उम्र का होने पर पूरी होती है। इन सभी स्कीम में अच्छा रिटर्न मिलता है पर हर स्कीम की लिक्विडिटी सीमित है। यहां निवेश करना बेहतर और सुरक्षित हो सकता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 8 साल में मैच्योर होते हैं। यह एक तरह से लिक्विड हैं क्योंकि यह NSE/BSE पर लिस्टेड हैं। हालांकि, अगर मार्केट में इन बॉन्ड्स की फेस वैल्यू पर डिस्काउंट चल रहा है तो आपको यह सस्ते में बेचना पड़ सकता है। Gold ETFs में बेहतर लिक्विडिटी है और कीमत कम है। मगर ETFs पर SGBs की तरह 2.5 फीसदी का ब्याज नहीं मिलता है।

गवर्नमेंट ऑफ इंडिया सेविंग्स बॉन्ड इन बॉन्ड्स को 7.75% सेविंग्स (टैक्सेबल) बॉन्ड्स, 2018 भी कहते हैं। आज के वक्त में जब RBI का रेपो रेट 5.4 फीसदी है तब 7.75 फीसदी को एक अच्छा रिटर्न कह सकते हैं। हालांकि यह बॉन्ड टैक्सेबल है। इन बॉन्ड्स की ट्रेडिंग सेकेन्ड्री मार्केट में नहीं कर सकते हैं औन न ही इन्हें बैंक से लोन लेने के लिए गिरवी रखा जा सकता है। इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 7 साल है। निवेश करने के बाद आप 7 साल से पहले इनसे बाहर नहीं निकल सकते हैं। सिर्फ एक उम्र वाले सीनियर सिटीजन 5 या 6 साल के बाद इस स्कीम से बाहर निकल सकते हैं।

बॉन्ड्स/डिबेंचर्स डिबेंचर खासकर कि जिनकी रेटिंग AAA से कम है उनकी लिक्विडिटी सेकेंड्री मार्केट में सिर्फ रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए सीमित है। इसका मतलब है कि आपको सस्ते में अपने डिबेंचर्स बेचने पड़ेंगे। इन बॉन्ड्स पर रिटर्न अलग-अलग समय पर निर्भर करता है। आमतौर पर जब महंगाई बढ़ती है तब ज्यादा रिटर्न मिलता है।