देवभूमि उत्तराखंड में 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है. अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट सुबह 8 बजे खुलेंगे और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में खोले जाएंगे.
लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन को आतुर हैं, केदारनाथ के लिए सबसे ज्यादा 5.96 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करा लिया है. लेकिन जिस धाम क्षेत्र में इतने श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं, वहां कपाट खुलने से पहले ही एक गंभीर संकट दस्तक दे रहा है और वो है कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत.
होटल, रेस्तरां और खाद्य सेवाओं पर गहरी पड़ी मार
जानकारी के अनुसार, यह संकट अचानक नहीं आया है इसकी जड़ें मध्य-पूर्व के उस युद्ध में हैं जिसने पूरे भारत की गैस आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है. भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है और उन आयातों का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है. ईरान-इजरायल और अमेरिका संघर्ष के कारण इस जलमार्ग के प्रभावी रूप से बंद हो जाने से भारत एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट के सामने खड़ा है.
सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत गैस आपूर्ति का प्राथमिकीकरण करते हुए कमर्शियल क्षेत्र में गैस की सप्लाई 30 से 50 प्रतिशत तक काट दी है. इससे होटल, रेस्तरां और खाद्य सेवाओं पर गहरी मार पड़ी है.
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व्यापारियों को 25 दिन में मिल रहा एक सिलेंडर
केदारनाथ मार्ग पर होटल, ढाबा, लंगर और धर्मशाला चलाने वाले व्यापारियों का कहना है कि हालात बेहद चिंताजनक हैं. इसका सीधा असर होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और धर्मशालाओं पर पड़ रहा है, जहां रोजमर्रा का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. स्थानीय निवासी और व्यापारी विक्रम सिंह रावत का कहना है कि 25 दिन में मुश्किल से एक कमर्शियल सिलेंडर मिल पा रहा है जबकि यात्रा सीजन में उनकी रोजाना की जरूरत कई गुना अधिक होती है.
बाजार में पांव पसार चुकी है कालाबाजारी
उत्तराखंड सरकार ने यात्रा से पहले बड़े-बड़े दावे किए थे. 'अतिथि देवो भवः' के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें हुईं और यात्रा को सुगम व सुरक्षित बनाने की बातें कही गईं, लेकिन जब व्यापारियों से बात करते हैं तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है. सरकार ने घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडरों की व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन सप्लाई पहले जैसी नहीं हो पा रही है. बीते हफ्तों में देहरादून में एलपीजी कालाबाजारी पर सख्ती करते हुए QRT ने गैस एजेंसियों और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की और सिलेंडर जब्त किए. यह अपने आप में यह बताता है कि संकट कितना गहरा है और बाजार में कालाबाजारी किस हद तक पांव पसार चुकी है.
यात्रा सफल होगी कैसे?
सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि समय रहते गैस और ईंधन की पर्याप्त सप्लाई कैसे सुनिश्चित की जाए, ताकि चारधाम यात्रा बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक पूरी हो सके. व्यापारियों का तर्क सीधा है अगर खाना पकाने के लिए गैस ही नहीं होगी, तो लाखों श्रद्धालुओं को खाना कहां से मिलेगा. पहाड़ी रास्तों पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था रातोंरात नहीं खड़ी की जा सकती. ऐसे में यह किल्लत न केवल व्यापारियों की जेब पर, बल्कि यात्रियों की थाली पर भी सीधा असर डालने वाली है.
आस्था और प्रशासन के बीच असली परीक्षा
श्रद्धालुओं की संख्या हर साल नए कीर्तिमान बनाती है और प्रशासन हर साल नई तैयारियों का ढोल पीटता है. लेकिन इस बार गैस संकट की शक्ल में जो चुनौती सामने आई है, वह न तो किसी मौसम की वजह से है न किसी आपदा की. यह एक नीतिगत विफलता है जो एक वैश्विक संकट के असर को जमीन पर पहुंचने से रोकने में नाकाम रही. अब देखना यह है कि बाबा केदार के कपाट खुलने के साथ-साथ सरकार के वादों के 'कपाट' भी खुलते हैं या नहीं.
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