उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में इस वर्ष से मोबाइल इस्तेमाल को लेकर सख्ती बरती जा रही है. जिसमें केदारनाथ धाम में अब मोबाइल और कैमरे के प्रयोग पर पूरी तरह से रोक लगने जा रही है. मंदिर परिसर में मोबाइल इस्तेमाल करने या रील बनाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. इसके लिए बद्री-केदार मंदिर समिति और रूद्रप्रयाग जिला प्रशासन मिलकर कार्य योजना तैयार कर रहे हैं.
मंदिर प्रबंधन का मानना है कि मोबाइल का आस्था से कहीं कोई लेना-देना नहीं है और लोग अब अत्यधिक प्रयोग कर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसे में इस पर प्रतिबन्ध लगाना जरुरी है. जल्द ही गाइड लाइन जारी की जाएगी.
रील और फोटो-वीडियो शूट से दिक्कत
केदारनाथ धाम में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन ले जाकर फोटो, वीडियो और रील बनाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इससे न सिर्फ मंदिर की मर्यादा प्रभावित होती है, बल्कि दर्शन के दौरान अन्य श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए अब मंदिर के भीतर और मंदिर परिसर में मोबाइल व कैमरे पर पूरी तरह बैन लगाने की तैयारी की जा रही है।.यदि कोई श्रद्धालु नियमों का उल्लंघन करते हुए मोबाइल या कैमरा ले जाता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
भारी जुर्माने के प्रावधान
डीएम प्रतीक जैन ने कहा कि “मंदिर समिति के साथ मिलकर केदारनाथ धाम में मोबाइल बैन को लेकर कार्य योजना बनाई जा रही है. मंदिर परिसर में मोबाइल प्रयोग और रील बनाने से अन्य श्रद्धालुओं को परेशानी होती है. इस बार नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा.
गौरतलब है कि इससे पहले भी मंदिर परिसर में रील्स और मोबाइल के प्रयोग पर रोक लगाने की बात कही गई थी, लेकिन वह पूरी तरह लागू नहीं हो पाई. इस बार प्रशासन और मंदिर समिति पहले से ही ठोस योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि यात्रा सीजन शुरू होने से पहले नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके.
समिति ने मोबाइल बैन का निर्णय लिया
समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने कहा “बद्री-केदार मंदिर समिति की बैठक में मोबाइल बैन करने का निर्णय लिया गया है. श्रद्धालु आस्था के साथ दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से व्यवस्था प्रभावित होती है. इस बार ऐसा नहीं होने दिया जाएगा.” बहरहाल, अब देखना होगा कि प्रशासन और मंदिर समिति की यह पहल केदारनाथ धाम की गरिमा बनाए रखने में कितनी कारगर साबित होती है.