कानपूर के फीलखाना थाना क्षेत्र में पत्नी के हाथों मारे गए मनीष गुप्ता के छह वर्षीय बेटे रियांश ने मासूमियत से घटना के बारे में कई राज बताएं. रियांश ने कहा कि उसकी मां हमेशा अपने बॉयफ्रेंड से बात करती थीं और रात में भी फोन पर बातचीत करती थीं. वह उन्हें ऐसा करने से मना करता था, लेकिन वे नहीं मानती थीं. उसने बताया कि उसने अपने पिता और दादू को भी इस बारे में बताया था.

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रियांश के अनुसार, घटना वाले दिन उसकी मां ने पहले उसके पिता के दोनों हाथों पर चाकू से वार किया, जिससे खून निकलने लगा, और फिर उनके पेट में चाकू घोंप दिया. उसने यह भी दावा किया कि उसकी मां एक दिन पहले जेड स्क्वायर मॉल से चाकू खरीदकर लाई थीं और वह भी उनके साथ गया था.

पिता की मौत के बाद बेटा अपने पापा के बारे में पूछता रहा

पिता की मौत से अनजान रियांश अपने दादा राम किशोर गुप्ता का हाथ पकड़कर घर में घूमता रहा और बार-बार पूछता रहा कि उसके पापा कब आएंगे. घर में मौजूद रिश्तेदार उसे बहलाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उसकी जुबान पर यही सवाल बना रहा. शाम को जब मनीष का शव कफन में लिपटकर घर पहुंचा तो परिवार में मातम छा गया.

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मां मीरा बेटे का चेहरा देखने की जिद करते हुए बेहोश हो गईं, जबकि रियांश लोगों से पूछता रहा कि यह कौन है. किसी ने भी उसे नहीं बताया कि वह उसके पिता हैं. बाद में भगवतदास घाट पर मनीष का अंतिम संस्कार किया गया. पिता की मौत और मां के जेल जाने के बाद रियांश अपने दादा से बार-बार पूछता रहा कि उसकी मम्मा कब आएंगी, जिस पर उसे दिलासा देते हुए कहा गया कि वह अगले दिन आ जाएंगी.

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मां अक्सर फोन पर करती थी अपने बॉयफ्रेंड से बात 

रियांश ने बताया कि उसका एक और नाम विष्णु है, जो उसकी मां ने रखा था, और वह लॉफ्टीवेल स्कूल में एलकेजी का छात्र है. उसने कहा कि उसकी मां अक्सर फोन पर कान में लीड लगाकर अपने बॉयफ्रेंड से बात करती थीं और उसने कई बार यह बात अपने पिता और दादू को बताई थी. घटना के बारे में बताते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने मां को फोन पर बात करने से रोका तो दोनों के बीच विवाद हो गया. इसके बाद मां ने चाकू से उनके हाथों और फिर पेट पर हमला कर दिया.

उसने यह भी कहा कि उसके पिता के शरीर से काफी खून निकल रहा था और बाद में उन्होंने पुलिस को फोन कर बताया कि उनकी पत्नी ने उन पर चाकू से हमला किया है. इसके बाद पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई और उसकी मां को भी अपने साथ ले गई.

बातचीत के दौरान रियांश ने अपने दादा से यह भी कहा कि अस्पताल में डॉक्टर झूठ बोल रहे थे कि बहुत देर हो गई, जबकि उसके दादा ने उसकी बात पर सहमति जताई. जब दादा ने उससे कहा कि उसके पापा अब नहीं रहे और उसकी मां जेल चली गई है, तो रियांश ने मासूमियत से जवाब दिया कि उसके पापा की मौत नहीं हुई है और उसकी मम्मा तो पुलिस स्टेशन में बात कर रही होंगी. उसकी बातें सुनकर वहां मौजूद पड़ोसियों और रिश्तेदारों की आंखें नम हो गईं.

फोन पर बात करने को मना किया तो पत्नी ने चाकू से किया हमला

पड़ोसियों का कहना था कि आरोपी महिला को कम से कम अपने बच्चे के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए था. वहीं, मनीष के पिता राम किशोर गुप्ता ने बताया कि वे परिवार के साथ एक 3 बीएचके फ्लैट में रहते थे. घटना वाले दिन उनकी पत्नी मीरा रसोई में थीं और बहू अपने कमरे में थी. जब मनीष कमरे में पहुंचे तो उन्होंने पत्नी को फोन पर बात करते देखा, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और बहू ने चाकू से उन पर हमला कर दिया. बेटे की चीख सुनकर मीरा कमरे में पहुंचीं तो वह खून से लथपथ पड़ा था. पुलिस को सूचना देकर पहले उसे केपीएम अस्पताल और फिर हैलट अस्पताल ले जाया गया.

राम किशोर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पहले अपने पौत्र रियांश के भविष्य को देखते हुए बहू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी और पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे छोड़ भी दिया था. हालांकि, इलाज के दौरान बहू ने कथित तौर पर धमकी दी कि यदि उसे रोका-टोका गया तो वह मनीष का दोबारा भी यही हाल करेगी. इसके बाद उन्होंने 14 जून को फीलखाना थाने में अपनी बहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई.

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