उत्तर प्रदेश में रोलिंग मिल उद्योग पर भी मौजूदा युद्ध के हालात का असर पड़ रहा है. गैस और कोयले की कमी के चलते ये उद्योग भी इन दिनों भारी संकट से गुजर रहे हैं. जिसकी वजह से उत्पादन लगभग आधा हो गया है. हालात ये हैं कि मज़दूर अब अपने गांवों और घरों की ओर पलायन करने लगे है. एबीपी न्यूज़ ने कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र में हालात जानने के लिए रोलिंग मिल की पड़ताल की. 

Continues below advertisement

कानपुर स्थित एक रोलिंग फैक्ट्री में जब एबीपी न्यूज़ के रिपोर्टर पहुंचे तो वहां के मालिक नरेश पंजाबी ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में रेलवे के माध्यम से रॉ मेटेरियल लाया जाता है, जिसे गैस से काटकर सरिया और एंगल जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं. 

रोलिंग कंपनियों में उत्पादन आधा हुआ

उनकी फैक्ट्री में कटिंग के लिए LPG और पीएनजी PNG गैस का उपयोग होता है. पहले पूरा माल गैस से काटा जाता था. लेकिन, अब गैस की किल्लत के कारण केवल हल्की कटिंग कर हैमरिंग के जरिए लोहे को तोड़ना पड़ रहा है.

Continues below advertisement

नरेश पंजाबी के अनुसार पिछले 15 दिनों से स्थिति बेहद खराब है. पहले जहां 10 मजदूर काम करते थे, अब केवल 4-5 लोग ही बचे हैं. आधी लेबर गांव लौट चुकी है. मजदूर अपने खाने पीने के लिये छोटे सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, जो पहले सामान्य दर पर मिल जाते थे, लेकिन अब 400-500 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहे हैं.

गैस की कमी के चलते पलायन को मजबूर लोग

कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई भी प्रभावित है. ₹1800 में मिलने वाला सिलेंडर अब ब्लैक में ₹6000 तक में खरीदा जा रहा है. जिन फैक्ट्रियों में PNG कनेक्शन है जो की करीब 200 फैक्ट्रियां हैं, वहां काम चल रहा है, लेकिन बाकी इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित है. उन्होंने यह भी बताया कि कोयले की कीमत ₹18,000 प्रति टन से बढ़कर ₹24,000 हो गई है, जिससे लागत और बढ़ गई है.

नरेश पंजाबी का कहना है कि बाजार में डिमांड पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता घट जाने से सप्लाई नहीं हो पा रही है. आम लोगों के पास खाने तक के पैसे नहीं हैं, ऐसे में निर्माण कार्य और लोहे की खरीद पर असर पड़ रहा है. 

वहीं कानपुर इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट को ऑपरेटिव स्टेट के अध्यक्ष विजय कपूर का कहना है कि उन्होंने सरकार से मांग की है कि गैस और कोयले की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए और उद्योगों को नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाए. उनका कहना है कि रोज डर बना रहता है कि कहीं फैक्ट्री पूरी तरह बंद न करनी पड़े.

UP Weather: यूपी में मौसम ने फिर ली करवट, नोएडा-आगरा समेत 17 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, लखनऊ में छाए बादल