Joshimath Crisis: उत्तराखंड (Uttarakhand) के जोशीमठ में जांच के लिए पहुंचे वैज्ञानिक ने बड़ी चेतावनी दी है. उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand) के उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर एमपीएस बिष्ट (Dr MPS Bisht) ने एबीपी से कहा कि "जोशीमठ का लोड उसके सहन करने की क्षमता को पार कर चुका है. 30 किलो उठाने की क्षमता पर 100 किलो का लोड है. यहां सीमेंट, कंक्रीट और सरिया का लोड बढ़ गया है. अलकनंदा के रिवर बेड पर छोटे छोटे लैंड स्लाइड (Landslide) दिखाई दे रहे हैं.

वैज्ञानिक ने कहा कि ये ताजी बर्फबारी (Snowfall) है और ये बर्फ पिघलकर नीचे जमीन में जायेगी. अगर दो तीन दिन तक ऐसी ही बर्फबारी होती रही तो इमारतों के ज्वाइंट और फ्रैक्चर बढ़ेंगे. जोशीमठ के ठीक ऊपर बसे औली में बीती रात जबरदस्त बर्फबारी हुई. इसकी वजह से पेड़-पौधे, इमारतें और सड़कें सभी बर्फ से ढ़ंक गए. यह इस सीजन की पहली बर्फबारी है. बर्फबारी की वजह से जोशीमठ पर संकट और भी बढ़ गया है.

भू-वैज्ञानिक का भी दावाइसके पहले कल IIT कानपुर के भू-वैज्ञानिक राजीव सिन्हा जो हाल ही में जोशीमठ का सर्वे करके लौटे हैं के मुताबिक, जोशीमठ को दोबारा बसाने की कोशिश खतरनाक है, क्योंकि ये स्लाइडिंग जोन में है और दशकों से स्लाइडिंग जोन में होने से पत्थर कमजोर हो गए हैं. प्रोफेसर राजीव सिन्हा जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने वाले हैं.

बता दें कि जोशीमठ में जमीन धंसने की घटनाओं से काफी संख्या में लोग विस्थापित हो रहे हैं. लोगों में दहशत का माहौल है और वे मजबूरी में अपना घर छोड़ रहे हैं. इस त्रासदी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार हरसंभव मदद में लगी है. वहीं वैज्ञानिकों की टीम पता करके समाधान खोजने में लगी है.

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