मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' अब अपने संचालन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एयरपोर्ट इमरजेंसी प्लानिंग कमेटी (AEPC) और पर्यावरण प्रबंधन समिति (AEMC) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में न केवल एयरपोर्ट की आपातकालीन तैयारियों का खाका खींचा गया, बल्कि सुरक्षा को लेकर कई कड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं.

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जेवर स्थित वाईआईएपीएल के प्रशासनिक कार्यालय में हुई इस बैठक में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया. जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और यमुना प्राधिकरण के बीच 'सुदृढ़ समन्वय' अनिवार्य है.

सुरक्षा के लिए बने कड़े नियम

इसके लिए सुरक्षा के कड़े नियम बनाए गए हैं. एयरपोर्ट क्षेत्र को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है. यहां ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. एयरपोर्ट की परिधि से 18 किलोमीटर की दूरी तक लेज़र लाइट का संचालन प्रतिबंधित होगा, ताकि विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में कोई जोखिम न रहे. यमुना प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि एयरपोर्ट क्षेत्र में भवनों की ऊँचाई और कलर कोड मानकों के अनुरूप ही हों.

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आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष ट्रेनिंग

बैठक में एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने आपातकालीन तैयारियों के प्रमुख बिंदुओं से प्रशासन को अवगत कराया. डीएम ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि आपदा की स्थिति में स्थानीय अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं के साथ ऐसा नेटवर्क बनाया जाए जो सेकंडों में रिस्पॉन्स दे सके. साथ ही, अब जनपद स्तरीय अधिकारियों को भी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे एयरपोर्ट की आपातकालीन कार्यप्रणाली को समझ सकें.

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, पर्यावरण पर भी प्रशासन सख्त है. यमुना प्राधिकरण और नगर पालिका जेवर को निर्देश दिए गए हैं कि एयरपोर्ट के आसपास कूड़े का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से हो, ताकि पक्षियों का खतरा कम रहे और स्वच्छता के मानक पूरे हों.