लखनऊ से 3 हजार मीटर दूर ईरान को आर्थिक सहायता भेजी जा रही है. दरगाह हजरत अब्बास में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे जो अपना पैसा ईरान वालों की मदद के लिए भेजे रहे है. QR कोड के मध्य से स्कैन करके ईरान एंबेसी पैसा भेजा जा रहा है. महिलाएं अपना जेवर बेचकर पैसा लाई, छोटे बच्चे अपनी गुल्लक लेकर पहुंचे. बच्चों ने अपनी गुल्लक तोड़ के ईरान की एंबेसी तक पैसा पहुंचाने की बात कही.
ईरान की मदद के नाम पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग जमा हुए. लोगों ने कहा कि ईरान की मदद जरूर करेंगे उसके लिए चाहे जेवर बेचना पड़े या कुछ भी करना पड़े. हम जरूर मदद पहुंचाएंगे, हमारे पास जो बचत के पैसे हैं वह सब ईरान को दे देंगे. ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने इंसानियत के लिए जान दे दी, हम लोग भी अपना मान ईरान के लिए कुर्बान कर देंगे.
मदद के लिए गुल्लक लेकर पहुंचे छोटे बच्चे
दरगाह के अध्यक्ष मीसम रिजवी ने कहा कि हम लोग QR कोड की मदद से सीधे ईरान एंबेसी को सहायता भेज रहे हैं. छोटे बच्चे अपनी गुल्लक लेकर आए है. ईरान में जो बमबारी हुई जिसमें छोटे बच्चे शहीद हो गए उनकी याद में हमारे बच्चे अपना पैसा लेकर पहुंचे हैं. फिलहाल कैश भेजने में थोड़ी सी समस्या आ रही है अगर हम लोग ईरान एंबेसी और ईरान कल्चरल हाउस में बात कर रहे हैं कि वहां का प्रतिनिधि आ जाए और वह कैश हमसे हासिल कर ले.
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अमेरिका और इजरायल का लोगों ने किया विरोध
मीसम ने कहा कि ईरान ने हमेशा हिंदुस्तान की मदद की है. गैस भेजा, ऑक्सीजन भेजा इसके अलावा तेल दिया पूरे विश्व में सबसे सस्ता ईरान ने ही तेल उपलब्ध कराया. ईरान के साथ हमेशा भारत का दोस्ताना वाला रवैया रहा है. युद्ध की स्थिति में ईरान ने किसी देश के लिए रास्ता ना खोला हो मगर भारत के लिए अपने रास्ते खोल दिए. इसके बाद भारत में गैस और तेल की मदद पहुंचाने लगी. इसलिए हम लोग इंसानियत के नाते ईरान की मदद करने आए हैं और अमेरिका इजरायल जो आतंकी हमले कर रहा है उसका विरोध करते हैं.
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