Bhadohi News: भदोही में ईरान-इजरायल युद्ध का असर, कालीन उद्योग को 6-7 हजार करोड़ के नुकसान का अंदेशा
Bhadohi News In Hindi: मुद्री रास्ते बंद होने से लगभग 6-7 हजार करोड़ के नुकसान का आकलन है वहीं तमाम शिपमेंट होल्ड पड़े हुए है. इसका सीधा असर विश्व विख्यात कालीन नगरी भदोही पर पड़ा है.

अमेरिका ईरान-इस्राइल में चल रहे युद्ध की चपेट में यूपी के भदोही कालीन उद्योग को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, युद्ध के चलते हवाई और समुद्री रास्ते बंद होने से लगभग 6-7 हजार करोड़ के नुकसान का आकलन है वहीं तमाम शिपमेंट होल्ड पड़े हुए है.
कालीन कारोबारियों ने कहा कि भारत सरकार को अब ध्यान देने की जरूरत है और युद्ध के चलते सैकड़ों हजारों कंटेनर रुके है उसके चार्ज डबल हो गए है उसमें छूट की आवश्यकता है सरकार मदद करे. भदोही और मिर्जापुर परिक्षेत्र का कालीन उद्योग इन दिनों वैश्विक राजनीतिक हलचलों की मार लगातार झेल रहा है.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर लगा ब्रेक
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर और के अमेरिका ईरान इजराइल के बीच टकराव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर ब्रेक लगा दिया है. इसका सीधा असर विश्व विख्यात कालीन नगरी भदोही पर पड़ा है, जहां हजारों परिवार इस उद्योग से जुड़े हैं.
कालीन हैंडीक्राफ्ट गारमेंट सेक्टर में लगभग 2 हजार करोड़ से ज्यादा का सालाना बिजनेस करने वाले काका ग्रुप के चेयरमैन वाई के राय उर्फ काका का कहना है कि इस युद्ध से हमारा करोड़ों के नुकसान होने की संभावना है. कई देशों के लिए रवाना होने वाले कंटेनर बंदरगाहों पर रुके हुए है.
सरकार से लगाई गुहार
भारत सरकार को इस ओर ध्यान देने की सख्त जरूरत है अगर यह युद्ध चलता रहा तो भारत की हस्त निर्मित कालीन समाप्त हो जाएगा. वहीं मौजूदा समय में पूरी दुनिया के कई देशों के बीच युद्ध और संघर्ष चल रहे हैं और इन युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के टैरिफ बम के बाद यह कालीन कारोबार बैसाखी पर तो था. लेकिन इस मौजूदा ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध से कालीन निर्यात ठप होने की कगार पर है.
कालीन निर्यातक दर्पण बरनवाल ने कहा कि इस समय जो हो रहा है उससे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा है कि करे तो करे क्या. दूसरे देशों के खरीदार भी कुछ नहीं बोल पा रहे है. उल्टे जो माल रास्ते में फंसा है. उसमें डिस्काउंट मांग रहे हैं.
क्या बोले कालीन निर्यातक तनवीर?
वहीं कालीन निर्यातक तनवीर हुसैन ने कहा कि इस युद्ध से फ्लाइट लगभग बंद है. वहीं समुद्री रास्ते भी बंद हो रहे हैं. कौन सा बम कब, कहा गिरेगा किसी को नहीं पता है. खरीदार भी अपनी सुरक्षा को देखते हुए नहीं आ रहे हैं. उल्टे करोड़ों रुपए के ऑर्डर को लटका दिया हैं.
उन्होंने बताया कि किसी तरह पहले के कुछ कंटेनर पहुंचे या पहुंच रहे है. उस पर छूट मांगी जा रही है. तनवीर हुसैन ने कहा कि यह कालीन उद्योग केवल बड़े लोगों का कारोबार नहीं है बल्कि यहां दूर-दराज गांवों में लाखों लोग इससे जुड़े है. अगर यही हाल रहा तो लगभग 20 लाख लोग इससे प्रभावित होंगे और चारों तरफ भुखमरी फैल जाएगी.
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