सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए तैयार हो गई है. इस बीच सपा की कैराना सांसद इकरा हसन की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि जब 20 जुलाई को आंदोलन के नेता उनसे (जेपी नड्डा) मिलने गए थे तो चार घंटे उनके बर्बाद कराए गए. इतने लोग इकट्ठा हुए थे. सरकार ने क्या किया? उन लोगों ने अपनी मांगे रखीं लेकिन इन्होंने न कोई आश्वासन दिया न कोई रिप्लाई दिया. 

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जो भी निर्णय हो वो सबके बीच में हो- इकरा हसन

इकरा हसन ने कहा, "अब जब सरकार का मन करेगा तो कमरे में बुलाकर दो लोगों से बात, ऐसे नहीं चलता है. किसी भी धरने या आंदोलन का नियम होता है कि जो खुला मंच है, जहां पर सब लोग इकट्ठा हुए हैं, उनके बीच में कोई भी बात हो और निर्णय भी उनके बीच में लिया जाता है. मैं सीजेपी के सभी लोगों और आंदोलन में शामिल छात्रों की बात से सहमत हूं कि जो भी निर्णय हो वो सबके बीच में होना चाहिए. कमरे में बुलाकर चार-चार घंटे बिठा लेंगे तो दुनिया पागल थोड़ी न है!"

सरकार धर्मेंद्र प्रधान को क्यों नहीं हटा रही- इकरा हसन

संसद का सत्र न चलने के सवाल पर उन्होंने कहा, "ये तो सरकार की जिम्मेदारी है कि सदन चले. विपक्ष अपनी मांग रखेगा. उसमें कहीं न कहीं तो कॉमन प्लैटफॉर्म पर आना पड़ेगा. हम सदन शुरू होने से पहले और इस आंदोलन के शुरू होने से पहले सुन रहे थे कि कैबिनेट में फेरबदल होगा. तो सरकार क्यों नहीं हटा दे रही है (धर्मेंद्र प्रधान को). कोई बहुत बड़ी मांग नहीं रखी गई है. बहुत छोटी सी मांग है. उस पर भी सरकार अपने अहंकार को लेकर बनी हुई है. न सरकार विपक्ष से बातचीत करने के लिए तैयार है और न छात्रों से बात करने को तैयार है."

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जेपी नड्डा न तो एजुकेशन, न होम, न प्राइम मिनिस्टर हैं- इकरा हसन

इसके आगे उन्होंने कहा, "जेपी नड्डा जी का क्या औचित्य बनता था उनको बुलाने का? वो न तो एजुकेशन मिनिस्टर हैं,  न होम मिनिस्टर हैं और न प्राइम मिनिस्टर है. उन्होंने उस दिन समय खराब किया. अब दोबारा वो वही करना चाहते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए. सोनम वांगचुक से विपक्ष के लोगों को मिलने नहीं दिया जा रहा है." 

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