Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में ग्रामीण विकास की धुरी हमेशा से पंचायतें रही हैं. पिछले कुछ सालों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'ई-गवर्नेंस' को गांवों तक पहुंचाकर एक बड़ी प्रशासनिक क्रांति की शुरुआत की है. यह केवल कंप्यूटर का उपयोग नहीं, बल्कि गांव के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने का एक माध्यम बन गया है.

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पंचायत सचिवालयों का आधुनिकीकरण

उत्तर प्रदेश की लगभग 58,000 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवालयों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण किया गया है. इन सचिवालयों को हाई-स्पीड इंटरनेट और कंप्यूटर सिस्टम से लैस किया गया है. सबसे महत्वपूर्ण कदम 'पंचायत सहायक-कम-डाटा एंट्री ऑपरेटर' की नियुक्ति रहा है, जिससे गांव के युवाओं को रोजगार मिला और ग्रामीणों को तकनीकी सहायता.

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ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और पारदर्शिता

ई-गवर्नेंस के तहत 'e-Gram Swaraj' पोर्टल के माध्यम से पंचायतों के वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है. पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) इसके जरिए विकास कार्यों का भुगतान सीधे डिजिटल सिग्नेचर (DSC) से होता है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है.ऑडिट ऑनलाइन: यूपी अब अपनी पंचायतों का शत-प्रतिशत ऑनलाइन ऑडिट कराने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है.

ई-साथी और जनसेवा केंद्रों का एकीकरण

अब ग्रामीणों को आय, जाति या निवास प्रमाण पत्र के लिए तहसील के चक्कर नहीं काटने पड़ते. पंचायत सचिवालयों में ही जनसेवा केंद्रों (CSC) की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से पेंशन योजनाएं, राशन कार्ड और खतौनी जैसी सेवाएं अब गांव में ही 'एक क्लिक' पर उपलब्ध हैं.

मातृभूमि योजना और स्मार्ट विलेज

उत्तर प्रदेश सरकार ने 'मातृभूमि योजना' शुरू की है, जिसमें प्रवासी भारतीय अपनी जड़ों से जुड़कर गांव के विकास में योगदान दे सकते हैं. ई-गवर्नेंस के जरिए इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है. इसके अलावा, गांवों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के काम ने डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया है, जिससे किसान अब 'ई-नाम' (e-NAM) जैसे पोर्टल्स के जरिए अपनी फसलों का सही दाम जान पा रहे हैं.

चुनौतियां और भविष्य की राह

निश्चित रूप से, डिजिटल साक्षरता और बिजली की निरंतर आपूर्ति जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं. लेकिन, 'स्मार्ट विलेज' की परिकल्पना अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश की पंचायतों में ई-गवर्नेंस ने न केवल प्रशासन को जवाबदेह बनाया है, बल्कि ग्रामीण जनता के आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है.

उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेंस का उद्देश्य 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' है. जब गांव का किसान अपने मोबाइल या पंचायत घर से सरकारी योजनाओं का लाभ लेता है, तो सही मायने में लोकतंत्र मजबूत होता है. ई-गवर्नेंस ने यूपी की पंचायतों को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर दिया है.