इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा पाइपलाइन से दूषित पानी के चलते लोगों की मौत के बाद साफ पानी के नाम पर इस इलाके में टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है. लेकिन, इन टैंकरों की हालत इतनी खराब है कि इनका पानी पीना भी मुश्किल है. जिससे बाद स्थानीय लोगों में बेहद आक्रोश देखने को मिल रहा है.

Continues below advertisement

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के द्वारा इन इलाकों में पानी पहुंचाने के लिए 40 साल पुराने टैंकरों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो निर्माण कार्य में उपयोग आते हैं. लोगों का कहना है कि ये पानी पीने लायक नहीं है. लेकिन उन्हें मजबूर किया जा रहा है कि क्योंकि जिन लोगों के पास सरकारी बोरवेल है उनके घर से बोरवेल का कट आउट निकाल लिया गया है. 

पुराने टैंकरों से सप्लाई किया जा रहा है पानी

टैंकर का ड्राइवर खुद बता रहा है यह टैंकर बहुत पुराना है और फायर ब्रिगेड या निर्माण के कार्य में इस्तेमाल होता है. कुछ लोग इस मजबूरी का फायदा उठाकर पानी बेच रहे हैं और 15 लीटर पानी की बोतल ₹20 में बेच रहे हैं. लोगों को मजबूरी में पानी खरीदना पड़ रहा है. 

Continues below advertisement

पानी खरीदने को मजबूर स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार के द्वार जो पानी के टैंकर भेज जा रहे हैं उनमें भी दूषित पानी है. विभाग 40 साल पुराने जंग लगे हुए टैंकर से पानी भेज रहा है. जांच में टैंकर के अंदर भी गंदगी मिली है. 15 मौतों के बाद भी सरकार पीने योग्य पानी नहीं भेज पा रही है. लोग अब भी साफ पानी के लिए तरस रहे हैं. 

लोगों का कहना है कि हमें आज भी शुद्ध पानी नहीं मिल रहा, क्या कैलाश विजयवर्गीय ये पानी पियेंगे? यहाँ तक की बोरिंग का पानी भी बंद कर दिया गया है. जिनके घरों में सरकारी बोरिंग है उसका कट आउट भी नगर निगम के कर्मचारी निकाल कर ले गए हैं. हम लोग अब बाहर से पानी खरीदने को मजबूर है.