Lucknow News: समाजवादी पार्टी ने आपातकाल की 50वीं बरसी पर केंद्र की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है. पार्टी ने कहा कि जैसे 25-26 जून 1975 की रात को देश में तानाशाही थोपी गई थी, उसी तरह आज भी लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. सपा ने कहा कि जिस तरह तब आम लोगों के अधिकार छीने गए थे, आज भी सरकारी तंत्र और एजेंसियों के जरिए जनता की आवाज को दबाया जा रहा है.

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 1975 में लगे आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर, मुलायम सिंह यादव और कई बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था. हजारों आम लोग भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल गए. उस वक्त देश की जनता ने 1977 में जनता पार्टी को जिताकर लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया.

लोकतंत्र को कमजोर कर रही बीजेपी- सपासपा ने आरोप लगाया कि आज बीजेपी सरकार एक बार फिर लोकतंत्र को कमजोर करने में जुटी है.संविधान की संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और संघीय ढांचे पर हमले हो रहे हैं. मीडिया और सरकारी मशीनरी को सत्ता के पक्ष में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

समाजवादी पार्टी ने बताया कि 2012 से 2017 के बीच मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने लोकतंत्र की रक्षा में योगदान देने वालों को सम्मानित किया. जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) की स्थापना कर लोकतंत्र सेनानियों की यादों को सहेजा गया. लेकिन बीजेपी सरकार ने इस स्मारक को ताले में बंद कर दिया.

सपा नेता राजेन्द्र चौधरी की भूमिका को किया गया यादआपातकाल के दौरान जेल जाने वाले समाजवादी नेता राजेन्द्र चौधरी की भूमिका को भी पार्टी ने याद किया. पार्टी ने बताया कि चौधरी ने न सिर्फ प्रतिरोध नाम की पत्रिका निकाली बल्कि गिरफ्तार होकर जेल भी गए. उनके ही नेतृत्व में लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2016 बना, जिसके तहत जेल जाने वालों को पेंशन मुफ्त इलाज और रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई.

पार्टी ने यह भी बताया कि, संविधान की रक्षा के लिए अखिलेश यादव के नेतृत्व में सभी जिला कार्यालयों पर संविधान मानस्तंभ स्थापित किए गए हैं. आगामी 26 जुलाई को भी ऐसे आयोजन होंगे. सपा ने साफ कहा कि जैसे 1975 में उत्तर प्रदेश ने लोकतंत्र बचाने की लड़ाई की अगुवाई की थी वैसे ही अब फिर से यूपी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव देश में लोकतंत्र की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं.

25 जून 1975 को हुई थी इमरजेंसी की घोषणाआपातकाल भारत के इतिहास का सबसे काला दौर माना जाता है. 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लागू की थी. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत लगाए गए इस आपातकाल में प्रेस की आज़ादी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया था. देश भर में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं. बाद में 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी की जीत हुई और लोकतंत्र बहाल हुआ.

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