उत्तर प्रदेश एसटीएफ के जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है. इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने जनवरी 2025 में शामली के झिंझाना इलाके में कुख्यात बदमाशों से मुठभेड़ के दौरान वीरता का परिचय दिया था. मुठभेड़ में गोली लगने के बाद इलाज के दौरान 22 जनवरी 2025 को उनकी मौत हो गई थी.

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एक लाख के इनामी बदमाश की मिली थी सूचना

20 जनवरी 2025 को एसटीएफ की मेरठ यूनिट को सूचना मिली थी कि एक लाख रुपये का इनामी बदमाश अरशद, जो मुकीम काला गैंग का सक्रिय सदस्य था, सफेद ब्रेजा कार से हरियाणा के चौसाना होते हुए बिडौली की तरफ जा रहा है. बदमाश किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था.

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ईंट भट्ठे के पास बदमाशों ने की फायरिंग

सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर सुनील कुमार टीम के साथ बिडौली-चौसाना तिराहे पर पहुंच गए. रात करीब 11 बजे सफेद ब्रेजा कार आती दिखाई दी. पुलिस ने कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन बदमाश गाड़ी लेकर तेज रफ्तार में चौसाना की तरफ भागने लगे. एसटीएफ टीम ने बदमाशों का पीछा किया. उदयपुर ईंट भट्ठे के पास बदमाशों ने कार रोक दी और पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

इसके बाद चालक सीट से उतरा एक बदमाश फायरिंग करते हुए मौके से भागने लगा. इंस्पेक्टर सुनील कुमार और उनकी टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना बदमाशों का सामना किया और उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया. जवाबी कार्रवाई के बाद एसटीएफ टीम ने कार में तीन घायल बदमाशों को पकड़ा.

बदमाशों की गोली से शहीद हुए इंस्पेक्टर

इनकी पहचान एक लाख के इनामी अरशद, मंजीत उर्फ ढिल्ला उर्फ जुबेर और मनवीर के तौर पर हुई. वहीं कार से भागा बदमाश सतीश भी कुछ दूरी पर घायल मिला. अस्पताल ले जाने के बाद चारों बदमाशों की मौत हो गई. विदित हो कि मुठभेड़ के दौरान बदमाशों की गोली इंस्पेक्टर सुनील कुमार को भी लगी. उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया. बाद में उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान 22 जनवरी 2025 को उन्होंने दम तोड़ दिया.

छह जवानों को मरणोपरांत कीर्ति चक्र

इस साल कुल छह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को मरणोपरांत कीर्ति चक्र दिया गया है. इनमें एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार भी शामिल हैं. वहीं इस साल किसी को भी अशोक चक्र नहीं दिया गया है. इंस्पेक्टर सुनील कुमार की शहादत को उनकी बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और देश की सुरक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के तौर पर याद किया जा रहा है.

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