पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को लेकर दिए बयान पर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम उमर अहमद इलियासी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अंसारी के बयान की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि मुसलमानों को भड़काने वाले बयान देश का माहौल खराब कर सकते हैं.

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इमाम इलियासी ने कहा कि किसी समुदाय को इस तरह इस्तेमाल कर भड़काने या उकसाने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए. उन्होंने अंसारी के बयान को पूरी तरह निंदनीय बताया. इलियासी ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों के पीछे देश का माहौल खराब करने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा होने की आशंका है.

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‘सत्ता में थे तब सेक्युलर, अब मुस्लिम समुदाय की याद’

इलियासी ने हामिद अंसारी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका विवादित बयान देने का पुराना इतिहास रहा है. उन्होंने दावा किया कि अंसारी जब सत्ता में और ऊंचे पदों पर थे, तब उन्होंने खुद को सेक्युलर रखा, लेकिन अब उन्हें मुस्लिम समुदाय की याद आ रही है. इलियासी ने यह भी आरोप लगाया कि अंसारी मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.

मोहन भागवत के बयानों का भी दिया हवाला

इलियासी ने कहा कि हामिद अंसारी को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मुस्लिम समुदाय से जुड़े बयानों को भी देखना चाहिए. उन्होंने भागवत के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें भारतीयों के डीएनए को एक बताया गया था. साथ ही उन्होंने मस्जिदों के नीचे शिवलिंग खोजने की कोशिश नहीं करने संबंधी भागवत की टिप्पणी का भी हवाला दिया. इलियासी ने कहा कि अंसारी को ऐसे बयानों का भी समर्थन करना चाहिए.

क्या कहा था हामिद अंसारी ने?

हामिद अंसारी ने एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में एजी नूरानी की किताब *The RSS: A Menace to India* का संदर्भ देते हुए जवाहरलाल नेहरू की एक पुरानी टिप्पणी का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि नेहरू के अनुसार भारत के लिए खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता था. अंसारी ने नागरिक राष्ट्रवाद की जगह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उभरने और धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकों में अंतर किए जाने को लेकर भी चिंता जताई थी.

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