जालौन के उरई में तैनात आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपनी जान का गंभीर बताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. जिसे लेकर वह इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं. उन्होंने तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि लगातार अनुरोध करने के बाद भी जानबूझकर उन्हें सुरक्षा नहीं दी जा रही है, क्या कोई दुर्घटना होने का इंतजार कर रहा है.
सुरक्षा नहीं देने का लगाया आरोप
रिंकू सिंह राही ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर कई पोस्ट की. उन्होंने आरोप लगाया और कहा कि 'जनपद के सीनियर अधिकारी द्वारा कहा गया कि मुझे होने वाले खतरों के कारण ही जांच हटाई गई हैं, अवैध खनन को रोकने से रोका गया था. आदि.. आदि.
जबकि मेरा कहना था कि यदि वास्तव में लगता है कि खतरा था/है, तो कार्य दायित्वों के निर्वहन करने से रोकने के स्थान पर सुरक्षा ही बढ़ा दें. क्या देश की सरहद (border) पर खड़े सैनिक को जान का खतरा नहीं होता है? क्या उस खतरे को देखकर उनसे कह दिया जाता है कि duty मत करो? वहां पर एकदम खतरा होता है. लेकिन, उन्हें ड्यूटी से न हटाकर उनके लिए रक्षोपाय किए जाते हैं, जिससे कि खतरा एकदम न्यून हो जाए.
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अन्यथा रास्ते में चलते समय कब दुर्घटना हो जाए, किसी को पता नहीं है, फिर भी लोग चलते हैं. इसलिए उनका किसी और मंशा से दिया गया निर्देश और खुद को एकदम सही दिखाने वाले कथन, मुझे मात्र बहाना ढूंढना ही लगे, क्योंकि मेरी सुरक्षा बढ़ाने के लिए, जो उनके पूर्णरूपेण अधिकार क्षेत्र में है, उसकी भी पहले अनुमति देकर भी बाद में अनुमति रोक दी गई है.'
जालौन प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
राही ने एक और पोस्ट में कहा कि 'कुछ का कहना है कि IAS बनने के बाद ही मुझे समस्याएं क्यों आने लगीं? जबकि सच यह है कि अब तक की चुनौतियों से बहुत ही ज्यादा गंभीर चुनौतियों का सामना पूर्ववर्ती सेवा (जिला समाज कल्याण अधिकारी) में किया है और हरेक चुनौती से कुछ न कुछ सीखने को मिला, विशेषकर कि इन चुनौतियों का समाधान के क्या विकल्प हो सकते हैं?
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अब मीडिया में मेरे कार्यों की चर्चा क्यों होती है? तो इसका उत्तर मेरे पास नहीं है, वैसे भी बहुत से मीडिया में काफी नेगेटिव भी रहता है। इसमें तो बस यह ध्यान आता है– "जाकी रही भावना जैसी" इसलिए इन सब पर सोचना भी समय व्यर्थ लगता है. जिसे जितना खोजना है, वे खोज लें. हालांकि कई पहले ऐसी भी रही हैं, जिनकी पुनरावृत्ति होने से आमजन को काफी लाभ मिलेगा.'
रिंकू राही ने कहा कि वो आमजन के सहयोग से केवल सकारात्मक कार्य ही करना चाहते है. बस हरेक जगह गंदगी होने के कारण यह लगभग सर्वव्याप्त हो चुकी कुव्यवस्था अपने साथ मुझे उलझा ही लेती है.
बस मेरी कमी यह है कि संवैधानिक व्यवस्था में नौकर होने के कारण वास्तविक मालिकों अर्थात–जनता/आमजन के साथ धोखा नहीं दे सकता. (हालांकि कभी कभी जाने अनजाने में मुझसे भी इस सिद्धांत से कुछ compromise हो जाता है– हालांकि यह भी नितांत ही गलत है, और पूरी कोशिश रहती है कि यह गलती न हो.
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