उत्तर प्रदेश में कितने लोग मांसाहारी? त्योहारों पर हर सेकेंड 3 बिरयानी और कवाब ऑर्डर! फिर भी 'एक जिला, एक व्यंजन' में जगह नहीं
UP Non Vegetarians: अगर यूपी सरकार ही राज्य की पहचान को 'शाकाहारी' बना रही है, तो क्या यहां मांसाहारी लोग नहीं रहते? जोमैटो के मुताबिक, यूपी में देर रात के ऑर्डर्स में बिरयानी टॉप पर बनी रहती है.

उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला, एक व्यंजन' (वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुजीन) योजना की लिस्ट ने नई बहस छेड़ दी है. इसमें सिर्फ शाकाहारी व्यंजनों को जगह मिली है, जबकि मांसाहारी व्यंजनों को नहीं. ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि आखिर उत्तर प्रदेश में शाकाहारी और मांसाहारी लोगों की संख्या कितनी है? इसके अलावा, बदलते समय के साथ अब स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म हमारे त्योहारों का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं, तो ईद, होली और दिवाली जैसे मौकों पर यूपी के लोग सबसे ज्यादा क्या ऑर्डर करते हैं?
'एक जिला, एक व्यंजन' योजना क्या है और यह विवादों में क्यों है?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर 2025 में 'एक जिला, एक व्यंजन' (ODOC) योजना की घोषणा की थी, जिसे बाद में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने जनवरी 2026 में लॉन्च किया. यह योजना सरकार की सफल 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना की तर्ज पर बनाई गई है, जिसका मकसद हर जिले के खास पारंपरिक व्यंजन को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है. इस लिस्ट में आगरा का पेठा-दालमोठ, अयोध्या की कचौड़ी-पेड़ा, मथुरा का पेड़ा, लखनऊ का मलाई मक्खन और चाट, बरेली के छोले-भटूरे और चाट, मेरठ की रेवड़ी-गजक, गोरखपुर के समोसे, सहारनपुर का शहद और वाराणसी की लस्सी जैसे कई प्रसिद्ध व्यंजन शामिल हैं.
हालांकि, इसमें लखनऊ के विश्व प्रसिद्ध गलौटी कबाब, टुंडे कबाब, निहारी-कुलचा, मुरादाबाद की बिरयानी, अवधी बिरयानी और रामपुर के सीख कबाब जैसे उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुके व्यंजनों को इस सूची में जगह नहीं मिली. प्रसिद्ध खाद्य इतिहासकार पुष्पेश पंत ने इसे 'अधकचरा कदम' और 'पक्षपातपूर्ण' करार दिया.
यह फैसला ऐसे राज्य में लिया गया है, जहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मांसाहारी है.
क्या वाकई उत्तर प्रदेश मांसाहारी राज्य है?
हां, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में करीब 54% महिलाएं और 66% पुरुष किसी न किसी रूप में नॉन-वेज (मछली, चिकन या अन्य मांस) खाते हैं. अंडा खाने वालों की हिस्सेदारी इससे भी ज्यादा है- करीब 60% महिलाएं और 74% पुरुष. कुल मिलाकर प्रदेश में 52.90% लोग मांसाहारी हैं. वहीं, पूरे देश में 15-49 उम्र के 83.4% पुरुष और 70.6% महिलाएं मांस खाते हैं. मीटी टेस्ट बड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में 55% लोग मांस खाते हैं.
NFHS-5 के डेटा के मुताबिक, यूपी में सिर्फ 0.8% महिलाएं और 2.2% पुरुष रोज नॉन-वेज खाते हैं, जबकि 19% महिलाएं और 28% पुरुष हफ्ते में कम-से-कम एक बार मांसाहार करते हैं. बड़ी आबादी कभी-कभार नॉन-वेज खाती हैं. इसका मतलब यह है कि यूपी पूरी तरह शाकाहारी राज्य नहीं है. यहां आधे से ज्यादा लोग किसी-न-किसी रूप में मांसाहार करते हैं.
त्योहारों पर स्विगी और जोमैटो पर यूपी का 'फूड मूड'
आज कल त्योहारों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर फेस्टिव सीजन के दौरान ऑर्डर्स में भारी उछाल देखा जाता है.
होली: रंगों के त्योहार में छाए पारंपरिक स्वाद
होली (फरवरी-मार्च) के दौरान, जब बड़ी संख्या में लोग यात्रा कर रहे होते हैं और छुट्टियां मना रहे होते हैं, तो पारंपरिक स्नैक्स की जबरदस्त डिमांड रहती है. स्विगी की 'फूड ऑन ट्रेन' सर्विस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान समोसे, लस्सी और प्याज कचौड़ी जैसे आइटम सबसे ज्यादा ऑर्डर किए गए.
ईद-उल-फितर: बिरयानी का रिकॉर्ड-तोड़ राज
ईद के मौके पर ऑनलाइन फूड ऑर्डर एक नए स्तर पर पहुंच जाता है. मार्च 2026 में ईद के दिन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- बिरयानी की बादशाहत: बिरयानी ने अपना अलग रुतबा कायम रखते हुए पूरे देश में 200 से भी ज्यादा ऑर्डर प्रति मिनट का आंकड़ा पार किया.
- मिठाइयों की मांग: बिरयानी के अलावा, मीठे की क्रेविंग भी चरम पर रही. गुलाब जामुन के प्रति मिनट औसतन 11 ऑर्डर दर्ज किए गए.
- हाई-वैल्यू ऑर्डर: यूपी के नोएडा से 38,165 रुपए का एक बड़ा ऑर्डर मिला, जो त्योहार पर समूहिक रूप से खाने-पीने के ट्रेंड को दर्शाता है.
नवरात्रि: व्रत और त्योहार का अनोखा फूड ट्रेंड
नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) के दौरान, खान-पान की आदतें पूरी तरह बदल जाती हैं. स्विगी के मुताबिक, मार्च 2026 में इस अवधि के दौरान कुल ऑर्डर्स में पिछले साल की तुलना में 25% की बढ़ोतरी देखी गई.
इस दौरान सबसे ज्यादा डिमांड व्रत या फलाहार से जुड़े खाद्य पदार्थों की रही:
- साबूदाना खिचड़ी: लगभग 222 ऑर्डर प्रति घंटे की दर से ऑर्डर की गई.
- साबूदाना वड़ा: यह दूसरे नंबर पर रहा, जिसके प्रति घंटे करीब 156 ऑर्डर आए.
- व्रत थाली: त्योहार के दौरान संपूर्ण भोजन की तलाश करने वालों के लिए यह एक पसंदीदा विकल्प रहा, जिसके प्रति घंटे लगभग 120 ऑर्डर दर्ज किए गए.
दिवाली: मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स और गिफ्टिंग का सीजन
दिवाली का त्योहार खुशियां बांटने और मिठाइयों के आदान-प्रदान का प्रतीक है. यह ट्रेंड ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग में भी साफ दिखाई देता है. स्विगी की सालाना रिपोर्ट 'हाउ इंडिया स्विग्ड 2025' के मुताबिक, अकेले अगस्त के महीने में हैदराबाद के एक ग्राहक ने त्योहारी सीजन की शुरुआत करते हुए 47,106 रुपए का भुगतान कर 65 बॉक्स ड्राई फ्रूट कुकीज गिफ्ट पैक का ऑर्डर दिया था.
हालांकि, बिरयानी का जादू साल भर बना रहता है. स्विगी की पूरे 2025 की रिपोर्ट बताती है कि पूरे साल में 93 मिलियन (9.3 करोड़) बिरयानी के ऑर्डर आए, यानी हर सेकंड 3.25 बिरयानी. जोमैटो की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल में 9.13 करोड़ से ज्यादा बिरयानी ऑर्डर हुईं, यानी औसतन लगभग 3 बिरयानी हर सेकंड डिलीवर हुईं. पिज्जा दूसरे नंबर पर रहा. यह बर्गर (44.2 मिलियन) और पिज्जा (40.1 मिलियन) जैसे दूसरे व्यंजन से कहीं आगे रही.
- फूड डिलीवरी में 'मीट' का दबदबा: 9.3 करोड़ बिरयानी ऑर्डर बताते हैं कि भारत और खासकर उत्तर प्रदेश में मांसाहारी भोजन की मांग भारी है.
- मिठाई बिकती है, कबाब भी: जहां मिठाइयों की बात आती है, तो गुजिया और गुलाब जामुन जमकर बिकते हैं. वहीं ईद जैसे मौकों पर कबाब भी खूब ऑर्डर होते हैं.
एक जिला-एक व्यंजन (ODOC) लिस्ट से मांसाहारी व्यंजनों को हटाना एक बड़ी बहस का सबब बन गया है. यह देखते हुए कि प्रदेश आधी से ज्यादा आबादी मांसाहारी है. क्या यह उनकी उपेक्षा नहीं है?


























