रंगों का त्योहार होली को लेकर पूरे देशभर में उत्साह का माहौल है. होली से पहले होलिका दहन की परंपरा है. साल 2026 में होलिका दहन की तारीख और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों के बीच थोड़ी उलझन है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहों के शुभ संयोग में होलिका दहन किया जाएगा.
आम लोगों में उलझन इसलिए भी थोड़ी बढ़ गई है क्योंकि फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि, भद्रा काल और चंद्र ग्रहण साथ में पड़ रहे हैं. इस साल होलिका दहन का मुहूर्त सोमवार (2 मार्च) को शाम 06:20 बजे से रात 8:30 बजे तक है.
यूपी के कुछ शहरों में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (Holika Dahan 2026 Muhurat in UP)
लखनऊ - शाम 06.08 - रात 8.36 बजे
वाराणसी - शाम 06.01 - रात 8.28 बजे
नोएडा - शाम 06.20 - रात 8.50 बजे
मथुरा - शाम 06.20 - रात 8.50 बजे
प्रयागराज- होलिका दहन का समय रात एक बजकर 16 मिनट पर होगा
गोरखपुर- होलिका दहन: रात 11:55 और भोर में 3:25
लखनऊ- शाम 6 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 53 मिनट
पूर्णिमा तिथि, भद्राकाल और चंद्रग्रहण
हिंदू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन करना ही श्रेष्ठ माना गया है. साल 2026 में पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च की शाम 5 बजकर 55 मिनट से होगी, जो 3 मार्च की शाम 4 बजकर 40 मिनट तक रहेगी. वहीं दूसरी तरफ भद्रा काल भी 2 मार्च की शाम से ही शुरू है, जो 3 मार्च की सुबह 5.09 बजे तक है. इसके अलावा 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी है.
भद्रा में शुभ कार्य वर्जित तो होलिका दहन कैसे?
मान्यता के मुताबिक भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य किया जाना वर्जित माना गया है. हालांकि शास्त्रों के मुताबिक भद्रा पुच्छ में होलिका दहन किया जा सकता है. भद्रा का चौथा चरण 2 मार्च की रात 12.50 बजे शुरू है. सूर्यास्त के समय के हिसाब से विभिन्न शहरों में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त थोड़ा अलग हो सकता है. वहीं 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने की वजह से इस दिन होली नहीं खेली जाएगी. इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगों के त्योहार का उत्सव मनाया जाएगा.
होलिका पूजन विधि
होलिका की पूजा में नई फसलों को अर्पित किया जाता है. खास तौर से खेतों से आई गेहूं की नई बालियां और घर में बने कई तरह के पकवान भी अर्पित किए जाते हैं. घी, पान के पत्ते, बताशा, हल्दी और उपले पूजन के समय चढ़ाए जाते हैं. होलिकाग्नि की 3 बार परिक्रमा की जाती है. परंपरा के मुताबिक कई जगहों पर होलिका दहन के बाद राख को माथे पर भी लगाया जाता है. होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. साथ ही इसे नई फसलों के आगमन के संकेत के तौर पर देखते हैं.
