धार्मिक नगरी हरिद्वार में अर्ध कुंभ मेले से पहले नगर निगम सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. नगर निगम क्षेत्र में चल रही मीट की अवैध दुकानों पर रोक लगाने का प्रस्ताव 6 अप्रैल की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा. खास तौर पर ज्वालापुर इलाके में कच्चा मांस बेचने और अवैध कटान करने वाली दुकानों को नगर निगम सीमा से बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है.

Continues below advertisement

मेयर किरण जैसल का कहना है कि यह फैसला ज्वालापुर के आम लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में पहले से ही मांस और मदिरा की बिक्री पर रोक है, लेकिन इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में ज्वालापुर में यह कारोबार तेजी से बढ़ा है. अब प्रशासन इस पर सख्ती से रोक लगाने के मूड में है.

कुंभ से पहले ‘सात्विकता’ की मुहिम

अर्ध कुंभ मेले से पहले शहर में सात्विकता बनाए रखने की मुहिम भी तेज हो गई है. महामंडलेश्वर डॉ. संतोष आनंद सरस्वती ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि तीर्थस्थल की गरिमा बनाए रखना सबसे जरूरी है और ऐसे स्थानों पर मांस और मदिरा जैसी गतिविधियों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए.

Continues below advertisement

साधु-संतों की और भी मांग

डॉ. सरस्वती ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि हरिद्वार के धार्मिक इलाकों से शराब के ठेकों को हटाया जाए. साथ ही गंगा तट और प्रमुख तीर्थ स्थलों के आसपास लहसुन और प्याज के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही है. उनका मानना है कि इससे न सिर्फ गंगा की शुद्धता बनी रहेगी, बल्कि श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक अनुभव भी बेहतर होगा.

इस पूरे मामले के बाद हरिद्वार में धार्मिक मर्यादा और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. एक तरफ लोग इसे आस्था से जुड़ा जरूरी कदम मान रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे रोजगार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं. अब सभी की नजर 6 अप्रैल की नगर निगम बैठक पर टिकी है, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.