उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ से आई इन दो तस्वीरों ने बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया है. इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ा कर बच्चों की जान जोखिम में डाला जा रहा है. जिन हाथों कॉपी और कलम होनी चाहिये, वह हाथ स्कूल बस को धक्का लगा रहे हैं.

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वहीं दूसरी तस्वीर में बच्चे खतरनाक तरीके से बैठकर सफर कर रहे हैं. मगर, हैरानी इस बात की है कि मामला सामने आने के बाद भी प्रशासन चुप्पी साधे हुआ है. दरअसल, पहली तस्वीर हापुड़ के बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव लुखराड़ा के पास की है. स्कूल जाने के लिए छात्रों को जद्दोजहद और मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है. बीच रास्ते में खराब हुई स्कूल की बस को करीब 8 से 10 छात्र और छात्राएं आगे बढ़ाने के लिए धक्का लगा रहे हैं. बस इतनी बड़ी है कि बच्चों से हिल भी नहीं पा रही है.

बच्चों की दुर्दशा से अनजान हैं परिजन

इन छात्रों के अभिभावकों ने अपने बच्चों की सहूलियत के लिए उनके आरामदायक तरीके से स्कूल आने और जाने के लिए बस की व्यवस्था की, लेकिन स्कूल प्रबंधन और जनपद हापुड़ के प्रशासनिक तंत्र की अनदेखी और लापरवाही के चलते इन बच्चों का यह हाल हो रहा है. बच्चों को बीच रास्ते में खराब हुई बस में धक्का लगाना पड़ रहा है.

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प्रशासन व आरटीओ की भूमिका पर उठे सवाल

स्कूल प्रबंधन या हापुड़ का प्रशासन, आरटीओ विभाग समय रहते इन प्राईवेट बस संचालकों की बसों की फिटनेस या सरकार अथवा सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई वाहनों के लिए गाइडलाइन को चेक कर ले, तो बस को आगे बढ़ाने के लिए इन नौनिहालों को न ही बस में धक्का लगाने की नौबत आए और न ही इनका जीवन भी खतरे में हो.

बहादुरगढ़ में जान जोखिम में डालकर सफर

वहीं, दूसरी तस्वीर हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव सलारपुर मोड़ की है. यहां तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा रहा है कि घर से पढ़ाई के लिए कॉलेज निकले इन छात्रों को अपनी जान जोखिम में डालकर कितना खतरनाक सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है.

जरा सी चूक पड़ सकती है भारी

दरअसल, जिस वाहन में यह छात्र सवार हुए हैं, वह वाहन भी सवारियों के लिए नहीं, बल्कि माल ढ़ोने के लिए है. यहां इस वाहन में करीब दो दर्जन छात्र वाहन (छोटा हाथी) के अंदर तो भरे हुए ही हैं, साथ ही दायें-बायें भी लटके हुए हैं. और वाहन सवार तेज रफ्तार में गाड़ी को सड़क के बीचों-बीच लहराता हुआ चला रहा है. जिससे बच्चे भी इस वाहन को पकड़कर झूलते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं. यहां जरा सी चूक किसी भी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. लेकिन न तो इससे वाहन के चालक को कोई फर्क पड़ रहा है और न ही यहां के पुलिस-प्रशासन को.

नियमों के उल्लंघन पर कड़ा एक्शन क्यों नहीं?

फिलहाल हापुड़ से सामने आई इन दो तस्वीरों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. सवाल उठता है कि जब सड़कों और हाईवे पर किसी वाहन के यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए की वीडियो वायरल होती है तो चालानी कार्रवाई कर फिर उन्हें जान से खिलवाड़ करने का लाइसेंस क्यों दे दिया जाता है.