Aligarh Lathmar Holi: वेद पुराणों में दर्ज महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि को ब्रजकोस की 84 कोस की परिक्रमा में शामिल किया जा चुका है, अलीगढ़ का धरणीधर सरोवर इस बार चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है. धरणीधर सरोवर पर देवी देवताओं निवास किया था, द्वापर युग में बहुत से राक्षसों का इस जगह पर वध किया गया था. महर्षि विश्वामित्र के द्वारा पृथ्वी की शांति के लिए इस जगह पर यज्ञ किया गया था, वह यज्ञ स्थल आज भी यहां पर मौजूद है. ब्रजवासी समाज के लोगों की तरफ से लठमार होली का आयोजन भव्य तरीके से किया गया. इस दौरान लठमार होली में दूर दराज से आए हुरियारों के द्वारा राधा कृष्ण की वेशभूषा में एक दूसरे को गुलाल लगाकर लठमार होली खेलकर एक दूसरे को आकर्षित किया.
होली को लेकर बताया जाता है कि वृंदावन में होने वाली लठमार होली की तर्ज पर इस होली का आयोजन किया गया था जिसमें होली गायन, लड्डू मार होली, गुलाल होली,और राधा कृष्ण नृत्य महाराज,पर कई जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित भी किया गया. धरणीधर सरोवर को लेकर बताया जाता है कि इस स्थल को तीर्थ स्थल में घोषित करने के लिए लगातार तैयारी चल रही है. दर्जनों ब्रजवासी समाज के लोग भव्य तरीके से इस प्रथा को आगे बढा रहे हैं जिससे भव्य होली को आगे भी मनाया जा सके.
ब्रजवासी समाज के लोग मिल-जुलकर खेलते हैं होलीब्रजवासी समाज न्यास के अध्यक्ष हरीश कटारा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस प्राचीन होली का कार्यक्रम लंबे समय से होता चला आ रहा है. ब्रजवासी समाज के लोग मिलजुलकर इस होली का आयोजन करते हैं. हिंदू समाज में भव्य तरीके से लठमार होली का आयोजन वृंदावन में किया जाता है लेकिन उसी की तर्ज पर सरोवर पर यह आयोजन होता चला रहा है प्राचीन स्थल के नाम से मशहूर धरणीधर पर यह कार्यक्रम आगे भी होता रहेगा.
खास बात यह है कि दूर दराज व अन्य जनपदों के लोग भी इस होली में शामिल होते हैं और होली का आनंद लेते हैं. लठमार होली के साथ-साथ फूलों की होली भी इस जगह पर आयोजित की जाती है. इस स्थल को तीर्थ स्थल घोषित करने के लिए ब्रजवासी समाज व धरणीधर स्थल कमेटी के द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही है.
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