गाजियाबाद, एबीपी गंगा। गाजियाबाद के फिरोजपुर गांव की बबिता की आंखों के आंसू आज भी सूखे नहीं है। पति की शहादत के 20 साल बाद भी बबिता जब अपने पति को याद करती है तो आंखें नम हो जाती है। बबिता के पति यशपाल आरआर कोर में गनर थे। वो गाजियाबाद के ही फिरोजपुर के रहने वाले थे। यशपाल और बबिता की शादी को कुछ ही महीने हुए थे तभी कारगिल युद्ध के बीच दुख भरी खबर घर आ गई थी। खबर आई कि युद्ध के दौरान दुश्मनों की गोलियों से यशपाल शहीद हो गए। बबिता पर तो मानो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो।
परिवारवालों ने बबिता पर दूसरी शादी करने के लिए खूब जोर दिया, लेकिन बबिता के मन में तो देश के लिए कुर्बान हुए अपने पति की छवि ऐसी बसी थी की उसने सभी दवाबों एक तरफ करके शादी से इंकार कर दिया। धीरे-धीरे बबिता ने अपनी जिंदगी की गाड़ी को यशपाल के बिना पटरी पर लाने की कोशिश की। कारगिल युद्ध को 20 साल हो गए हैं। बबिता अब अपने भाइयों के साथ रह रही है।
पति पर फख्र करने वाली बबिता को सरकार से शिकायत भी है। सरकार की तरफ से पेट्रोल पंप और मदर डेयरी की घोषणा तो हुई, लेकिन भाग-दौड़ करने के बावजूद बबिता के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। आज बबिता को सिर्फ अपने भाइयों का सहारा है। बबिता तीन भाई उसके लिए हमेशा तैयार खड़े हैं।