Greater Noida News: सूरजपुर में निर्माणाधीन मकान से गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
Greater Noida News In Hindi: सूरजपुर कस्बे में निर्माणाधीन मकान की तीसरी मंजिल से गिरने से तीन साल के मासूम की मौत हो गई. परिजनों ने अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया.

यूपी के ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर कस्बे से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां तीसरी मंजिल से नीचे गिरने से एक 3 साल के मासूम की मौत हो गई. वहीं घायल मासूम को अस्पताल ले जाया गया जहां अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगा कर परिजनों ने हंगामा किया.
मौके पर पहुंची सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने समझा-बुझाकर शांत कराया. कोतवाली प्रभारी का कहना है कि पंचनामा की कार्रवाई की गई है. जिसके बाद परिजनों को बच्चे का शव सौंप दिया गया. परिजनों की तरफ से अभी कोई शिकायत नहीं दी गई है.
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, मूलरूप से हमीरपुर निवासी अशोक अपने परिवार के साथ कस्बा में रहते हैं और मजदूरी करते हैं. निर्माणाधीन मकान की तीसरी मंजिल से खेलते समय 3 साल का गगन 6 मार्च को नीचे गिर गया था. गगन के पिता यानी अशोक उस समय उसी मकान में काम कर रहे थे. जैसे ही इस घटना की सूचना मिली, वैसे ही मौके पर हड़कंप मच गया. मौके पर मौजूद लोगों ने आनन-फानन में घायल को उपचार के लिए शारदा अस्पताल में भर्ती कराया. जहां उपचार के दौरान 3 साल के मासूम गगन की मौत हो गई.
मासूम की मौत के बाद भड़का मामला
मौत की सूचना मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया. परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर हंगामा करना शुरू कर दिया. घंटों तक अस्पताल में बहस और गहमा गहमी का दौर जारी रहा जिसके बाद सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने वहां पहुंच कर उन्हें शांत करवाया.
सूरजपुर कोतवाली प्रभारी का कहना है कि बच्चे का पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही थी, लेकिन परिजनों ने इनकार कर दिया. पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया. बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है.
अस्पताल मैनेजमेंट का भी आया बयान
वहीं अस्पताल मैनेजमेंट की तरफ से बताया गया कि जब बच्चा अस्पताल लाया गया, उस समय उसकी हालत पहले से ही बेहद गंभीर और नाजुक थी. ऊंचाई से गिरने के कारण उसे गहरी अंदरूनी चोटें लगी थी. बच्चे का समय रहते इलाज शुरू कर दिया गया था. डॉक्टरों ने बच्चे की जान बचाने का पूरा प्रयास किया, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि अस्पताल ने न तो कोई रुपये मांगे और न ही लिए गए. मरीज का इलाज पूरी तरह से नि:शुल्क किया गया था, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और हमारे पास परिवार के हस्ताक्षर वाले पूरे डॉक्यूमेंट्स भी हैं. हमारा सिद्धांत हमेशा से यही रहा है कि आपातकालीन स्थिति में मरीज की जान बचाना ही हमारी प्राथमिकता होती है, इस मामले में भी हमने वही किया.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL


























