ग्रेटर नोएडा बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी साइबर ठगी के मामले में अहम सफलता हासिल की है. पुलिस ने उस आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने टेलीग्राम कॉल के जरिए ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 स्थित पैरामाउंट सोसाइटी में रहने वाले एक रिटायर्ड अधिकारी को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर 75.57 लाख रुपये की ठगी की थी. इस सनसनीखेज मामले में पुलिस अब तक पीड़ित अधिकारी को करीब 47 लाख रुपये वापस करा चुकी है.
ग़ौरतलब है कि मामला 19 मार्च 2024 का है, जब रिटायर्ड अधिकारी अंतिल विश्वास को टेलीग्राम पर एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को अंतरराष्ट्रीय पार्सल सेवा से जुड़ा बताया और कहा कि आपके द्वारा ताइवान भेजे गए पार्सल में दो किलो ड्रग्स बरामद हुए हैं. इसके बाद कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट कर लिया. धमकी और डर के माहौल में पीड़ित से तीन अलग-अलग खातों में कुल 75.57 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करा लिए गए.
पुलिस ने महाराष्ट्र से किया मुख्य आरोपी को गिरफ्तार
वहीं पीड़ित की शिकायत पर बीटा-2 कोतवाली में तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. जांच के दौरान पुलिस ने ठगी में शामिल खातों और ट्रांजेक्शनों की गहन जांच की. तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महाराष्ट्र के पुणे निवासी गणेश सूर्यकांत ओटी को मुख्य आरोपी के रूप में चिह्नित किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाला गिरोह
एडीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर कुमार का कहना है कि आरोपी बड़े साइबर गिरोह का हिस्सा है, जो वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त अधिकारियों को निशाना बनाकर उनसे ठगी करता था. पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है.
एडीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर कुमार का कहना है कि यह ठगी डिजिटल अरेस्ट के नए तरीकों से जुड़ी है, जिसमें अपराधी विदेशी पार्सल, ड्रग्स या इंटरपोल जांच का डर दिखाकर लोगों से भारी रकम वसूलते हैं. ग्रेटर नोएडा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे किसी कॉल पर विश्वास न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने से संपर्क करें.