उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा, यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में हर साल बाढ़ आने से बड़ा नुकसान होता है. बाढ़ की वजह डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण माना जा रहा है. स्कूल, फार्म हाउस, क्रेशर प्लांट, होट मिक्स प्लांट, कंक्रीट रेडी मिक्स प्लांट आदि का अवैध निर्माण होने से यमुना और हिंडन के पानी में अवरोध उत्पन्न होता है. जिसकी वजह से बाढ़ आने से भारी धन और जनहानि होने की आंशका रहती है. इस बार बाढ़ से होने वाले नुकसान की भरपाई शासन और प्रशान की तरफ से नहीं की जाएगी. इसके बाद स्थानीय लोगों में भय व्याप्त हो गया है.

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ये क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित 

अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड गाजियाबाद के मुताबिक, हिंडन एवं यमुना नदी के डूब क्षेत्र में छजारसी, चोटपुर, यूसुफपुर, चकशाहबेरी, बहलोलपुर गढीचौखंडी, हैबतपुर, पर्थला खंजरपुर, सौरखा, अलावर्दीपुर, जलपुरा, कुलेसरा, इलाहबास, शहदरा, लखनावली, बेगमपुर, झटटा, बादौली, कोंडली बांगर, सफीपुर, चुहडपुर, मोमनाथल व अन्य डूब क्षेत्र की परिधि में आते है. यमुना नदी के बाए किनारे पर मोतीपुर, तिलवाड़ा, गढ़ी समस्तीपुर, बादौली खादर, कामबक्शपुर, गुलावली, मंगरौली, छपरौली, असदुल्लापुर और हरियाणा की तरफ औरंगाबाद, दलेलपुर, याकूतपुर भी डूब क्षेत्र में आते है.

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अवैध निर्माण बड़ा कारण 

उन्होंने बताया कि इस डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में भवन निर्माण और कंक्रीट रेडी मिक्स जैसे अन्य गतिविधियां की जा रही है. अवैध निर्माण की वजह से नदी के पानी के सामने अवरोध पैदा होने से बाढ़ की स्थिति बनती है. अवैध निर्माण और बड़ी संख्या में घर बनने की वजह से बाढ़ के समय सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन और शासन की तरफ से सुरक्षा प्रदान करना संभव नहीं हो सकेगा. एनजीटी ने भी इस क्षेत्र में अवैध निर्माण पर रोक लगाई हुई है.

उन्होंने बताया कि अवैध निर्माण के कारण बाढ से होने वाले की नुकसान की भरपाई शासन द्वारा नहीं की जाएगी. साथ ही बाढ सुरक्षा कार्य नहीं कराए जाएंगे. अवैध निर्माण से होने वाली क्षति की वसूली अवैध निर्माण करने वालों से वसूली जाएगी. सिचाई विभाग ने समय रहते अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए है. ऐसा न करने पर विभाग अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाइ्र करेगा.

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