ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव में एक शहीद पिता की बेटी की शादी में कन्यादान करने आये पंजाब से 50 जवान चर्चा का विषय है. दरअसल मंगलवार की शाम को गांव के ही रहने वाले शहीद सुरेश सिंह भाटी की बेटी की शादी थी, सब शादी की तैयारियों में लगे हुए थे. इसी बीच सेना के जवान से भरी बस गांव में आकर रुकी जिसे देख लोग अचंभित हो गए. इसी बीच 50 जवान पंडाल में पहुंचे और शादी का सारा कार्यभार उठाया और बेटी का कन्यादान भी किया. इस नजारे को देख सब की आंखे नम हो गई.
ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव में वह दृश्य देखने को मिला, जिसे जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हुए बिना नहीं रहीं. शहीद सुरेश सिंह भाटी की बेटी की शादी में पंजाब से आए 50 सेना के जवानों ने कन्यादान कर एक अनोखी और भावुक परंपरा की मिसाल पेश की. यह पल पूरे गांव के लिए गर्व और भावनाओं का संगम बन गया.
जवानों ने निभाई कन्यादान की रस्म
वहीं शादी की तैयारियों के बीच अचानक सेना के जवानों से भरी एक बस पंडाल के बाहर आकर रुकी. पहले तो गांव के लोग हैरान रह गए, लेकिन जब एक–एक कर 50 जवान बस से उतरे और सीधे पंडाल की ओर बढ़े, तो हर किसी के चेहरे पर गर्व और भावुकता की झलक दिखने लगी. गौरतलब है की जवानों ने न सिर्फ शादी की पूरी जिम्मेदारी संभाली बल्कि कन्यादान भी किया. यह दृश्य इतना मार्मिक था कि पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक उठीं. यह शादी देखते ही देखते गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गई.
बारामूला आतंकी हमले में हुए थे शहीद
जानकारी के अनुसार, बेटी की पिता 2006 में बारामूला हमले में शहीद हुए थे. गांव के लोगों ने बताया कि 5 जुलाई 2006 को कश्मीर के बारामूला में आतंकी हमले में सुरेश सिंह भाटी शहीद हो गए थे. देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भाटी की शहादत को आज भी लोग गर्व से याद करते हैं.
दरअसल उनका बेटा हर्ष भाटी आज सेना में भर्ती होकर पिता की राह पर चल रहा है और देश की सेवा कर रहा है. शादी की बारात ग्रेटर नोएडा के ही कासना गांव से आई थी. परिवार ने सेना के कुछ जवानों को निमंत्रण भेजा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि 50 सैनिक एक साथ आकर परिवार को इतना बड़ा सम्मान देंगे.
कन्यादान के समय सभी की आंखें हुईं नम
जब सेना के जवानों ने मिलकर शहीद की बेटी का कन्यादान किया, तो माहौल पूरी तरह भावुक हो गया. जवानों ने शहीद की बहादुरी और देश सेवा की कहानियां साझा करते हुए परिवार को सम्मान दिया. उन्होंने हर्ष भाटी को अपने पिता के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित भी किया.
शादी की हर जिम्मेदारी संभालकर बड़ा संदेश दे गए सैनिक
जवानों ने केवल कन्यादान ही नहीं किया, बल्कि तमाम शादी की रस्मों को भी निभाया. पंडाल की व्यवस्था, बेटी को आशीर्वाद, रस्मों की देखरेख—हर काम में उन्होंने परिवार का साथ दिया. बराती भी यह अनोखा दृश्य देखकर भावुक हो गए और पूरे गांव में सेना के प्रति सम्मान और बढ़ गया. यह शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि शहीद परिवार के सम्मान और देशभक्ति का अद्भुत उदाहरण बन गई है. आसपास के गांवों में लोग इस अद्वितीय कन्यादान की चर्चा करते नहीं थक रहे.