ग्रेटर नोएडा में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा ने समाज सुधार और शैक्षिक जागरूकता को केंद्र में रखते हुए अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा की है. संगठन ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में गुर्जर समाज के भीतर फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने, दहेजमुक्त विवाह को प्रोत्साहित करने तथा बच्चों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करने जैसे मुद्दे प्राथमिकता में रहेंगे. महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीशचन्द्र भाटी ने संगठन को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दो वरिष्ठ समाजसेवियों सविंदर भाटी और के.पी. कसाना को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त करने की घोषणा की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महासभा केवल एक सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला मंच है, जिसका उद्देश्य परंपराओं का सम्मान करते हुए सकारात्मक बदलाव लाना है.

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संगठन देशभर में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर सक्रिय

महासभा, जिसकी स्थापना वर्ष 1908 में हुई थी, आजादी से पहले की एक ऐतिहासिक संस्था मानी जाती है. संगठन देशभर में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और संगठनात्मक मजबूती के लिए निरंतर सक्रिय रहा है. नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही महासभा ने अहम संकेत दिए हैं. अब सामाजिक कुरीतियों और आर्थिक अपव्यय जैसे विषयों पर व्यापक स्तर पर संवाद और अभियान चलाए जाएंगे.

संगठन के पदाधिकारियों ने दी यह जानकारी

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च को कम करने, दहेज प्रथा के विरुद्ध जागरूकता फैलाने तथा युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रोफेशनल कोर्स और आधुनिक शिक्षा की ओर मार्गदर्शन देने के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं. 

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इसके साथ ही समाज के मेधावी और जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे. इसी क्रम में महान क्रांतिकारी एवं समाज सुधारक विजय सिंह पथिक की जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान में होगा कार्यक्रम

यह आयोजन गुर्जर संस्कृति शोध संस्थान में होगा, जहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अतिथि, शिक्षाविद, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे. कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के इतिहास, संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ शिक्षा और सामाजिक एकता के महत्व को रेखांकित करना है.

महासभा की इस पहल को समाज के भीतर सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है. इससे आने वाले समय में सामाजिक चेतना और शैक्षिक उन्नति को नई गति मिलेगी.