उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पूरी दुनिया को क्रिया योग का पाठ पढ़ाने वाले योगगुरु परमहंस योगानंद से जुड़ी एक विशेष धरोहर का कायाकल्प करने में जुटी है. मुख्यमंत्री की मंशा और उनके दिशानिर्देश पर परमहंस योगानंद की गोरखपुर स्थित जन्मस्थली को भव्य स्मारक के रूप में संवारा जा रहा है.

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योगगुरु परमहंस योगानंद का जन्म 5 जनवरी 1893 में गोरखपुर के मुफ्तीपुर मोहल्ले में (कोतवाली थाना के समीप) किराए के एक मकान में हुआ था. उनके पिता भगवती लाल रेल कमर्चारी थे. जन्म के बाद परिजनों के साथ योगानंद जी का आठ वर्ष तक का समय यहीं गुजरा. 

परमहंस योगानंद का भव्य स्मारक

गोरखपुर रहने के दौरान योगानंद बचपन में ही भारत की वैश्विक विरासत योग से बेहद प्रभावित हो गए थे. कहा जाता है कि बालक योगानंद गोरखनाथ मंदिर जाते तो ध्यानमग्न हो जाते. कालांतर में उनकी ख्याति क्रिया योग के मर्मज्ञ और आध्यात्मिक गुरु के रूप में देश और दुनिया में प्रतिष्ठित हुई. 

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विदेशों में परमहंस योगानंद के शिष्य और अनुयायी बड़ी संख्या में हैं. योगानंद जी की जन्मस्थली होने की वजह से वो समय-समय पर गोरखपुर भी आते थे, जिसके बाद से कई बार इस स्थान को अध्यात्म केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग उठती रही है. सीएम योगी ने इसे गंभीरता से लेते हुए योगानंद की जन्मस्थली को पर्यटन केंद्र में विकसित करने का फैसला लिया है. 

सीएम योगी ने पर्यटन विभाग को दिए निर्देश

पर्यटन विभाग ने मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में योगानंद जी की जन्मस्थली पर करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से योग भवन बनाने की कार्ययोजना तैयार की है जिसका मई 2025 में शिलान्यास खुद सीएम योगी ने किया था. पर्यटन विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव बताते हैं कि वर्तमान समय में स्मारक निर्माण का कार्य तेजी से जारी है. अब तक 22 प्रतिशत कार्य कराया जा चुका है. 1 जुलाई 2027 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य है.

हर मंजिल पर संजोई जाएंगी योगानंद की यादें

कोतवाली थाना के पास चार मंजिला स्मारक भवन की हर मंजिल पर अलग-अलग तरीके से योगानंद की यादें संजोयी जाएंगी. कार्ययोजना के मुताबिक जन्मस्थली पर भूमि तल के बाहर हिस्से एक लॉन विकसित किया जाएगा, जिसमें योगानंद की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी. पहले तल पर एक संग्रहालय और पुस्तकालय बनाया जाएगा, जिसमें योगानंद की अलग-अलग मुद्रा में चित्रों को अवलोकनार्थ सजाया जाएगा. 

योगानंद से जुड़े बहुमूल्य सामानों का भी प्रदर्शन किया जाएगा. दूसरा तल आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगा. इसमें उस स्थान को मंदिर का स्वरूप दिया जाएगा, जहां योगानंद जी का जन्म हुआ था. मंदिर के सामने केंद्र का दूसरा योग सेंटर बनाया जाएगा, जिसमें बैठकर योगानंद की शिष्य परंपरा के लोग योग व ध्यान कर सकेंगे. 

तीसरे और अंतिम तल पर दो हाल बनाए जाएंगे, जिसमें योगाभ्यास करने का इंतजाम रहेगा. ध्यान के लिए अगल से स्थान निर्धारित रहेगा. योगगुरु परमहंस योगानंद की जन्मस्थली के पर्यटन विकास से विदेशी पर्यटकों के आने की संख्या लगभग 10 गुना बढ़ने की उम्मीद है.

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