गोरखपुर में घरेलू गैस सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा हुआ है. लोग सड़कों पर रतजगा करने के लिए मजबूर हैं. जिले के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित गंगा गैस एजेंसी पर हालात ऐसे हैं कि लोग रात-रात भर सिलेंडर की रखवाली करते हुए अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं. भीषण गर्मी, मच्छरों का हमला और लंबी कतारें हैं, लेकिन गैस पाने की मजबूरी लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारने पर मजबूर कर रही है. हालांकि, जिला प्रशासन ने गैस की किल्लत से इनकार किया है.

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प्रशासनिक दावों के बीच भीषण गर्मी और उमस में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं. लोगों का आरोप है कि गैस की सप्लाई पर्याप्त नहीं होने से रोजाना अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है. गोरखपुर के हाँसूपुर रहने वाले राजाराम ने बताया कि हर महीने इसी तरह लाइन लग रही है. उन्होंने बताया कि तीन-तीन चार-चार दिन लाइन लगाने के बाद भी घर वापस जाना पड़ रहा है.

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सिलेंडर के लिए करना पड़ता है रतजगा

इसी तरह गोरखपुर के बेलीपार से आई बुजुर्ग महिला मनभावती देवी अपनी पीड़ा बताते हुए कहती हैं कि वह शाम 5:00 बजे से लाइन में लगी हैं. पांच बार लाइन में लगने के बावजूद उन्हें सिलिंडर नहीं मिल पाया है. वह अपने पति के साथ लाइन में लगे आती है लेकिन भीषण गर्मी और उमस में लाइन में लगने की वजह से उनकी तबीयत खराब होने की वजह से आज पूरी रात सड़क पर अकेले गुजरना पड़ रहा है.

हालांकि, जिला प्रशासन और गैस एजेंसी का दावा है कि जिले में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य है. लेकिन तस्वीरें प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं. गोरखपुर के महावीर छपरा से ट्रांसपोर्ट नगर गैस एजेंसी पर कतार में लगी बेलमती देवी सवाल करने पर नाराज हो जाती हैं.

6 दिनों से लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिला सिलेंडर

वह कहती हैं कि दिक्कत और परेशानी नहीं होती, तो वह लोग इतनी दूर से आकर आधी रात को यहां लाइन में क्यों लगते? लकड़ी पर खाना पकाने की वजह से आंख में धुआं लगता है और आंख में दर्द होने लगता है. 6 दिन से लाइन में लग रही है लेकिन सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है.

गोरखपुर की रहने वाली राधिका कहती हैं कि परेशानी होने की वजह से ही वे लोग लाइन में इतनी रात को लगे हैं. लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में देरी हो जाती है, जिससे बच्चों को सुबह जल्दी स्कूल जाने में परेशानी होती है. वे लोग चार-पांच दिन से रोज रात में लाइन लग रहे हैं लेकिन सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है. फिलहाल, सवाल ये है कि अगर सबकुछ सामान्य है तो आखिर उपभोक्ताओं को रातभर सड़क किनारे गैस सिलेंडर के साथ क्यों सोना पड़ रहा है?

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