गोंडा में लोन के नाम पर 21 करोड़ रुपये का घोटाला, तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत 16 के खिलाफ FIR
UP News: इस मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं और अपने परिजनों को तथाकथित “सिंडिकेट” में शामिल कर नियमों को ताक पर रखकर ऋण मंजूर किए.

उत्तर प्रदेश के गोंडा में ऋण वितरण के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और बैंकिंग घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है. जांच में 205 खाताधारकों के ऋण खातों और पांच आंतरिक खातों से कुल 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता किए जाने का खुलासा हुआ है. इस प्रकरण में तत्कालीन शाखा प्रबंधक, प्रबंधक, कैशियर और 12 खाताधारकों सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की बड़गांव शाखा से जुड़ा है. बैंक के मुख्य प्रबंधक भुवन चंद्र सती ने इस घोटाले की शिकायत विनीत जायसवाल, पुलिस अधीक्षक, गोंडा से की थी. आंतरिक जांच टीम की रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि होने के बाद शिकायत के आधार पर नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई. शिकायत और जांच में आरोप सही पाए जाने पर सामने आया कि आरोपियों ने संगठित गिरोह बनाकर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे बिना पात्रता और आवश्यक सत्यापन के ऋण स्वीकृत किए.
तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं और अपने परिजनों को तथाकथित “सिंडिकेट” में शामिल कर नियमों को ताक पर रखकर ऋण मंजूर किए. आरोप है कि ऋण देने से पहले न तो केवाईसी और अन्य आवश्यक दस्तावेज पूरे किए गए और न ही खाताधारकों का भौतिक सत्यापन कराया गया. इसके बाद विभिन्न खाताधारकों के खातों से धनराशि अपने और अपने करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई.
जांच में यह भी सामने आया कि खातों को एनपीए घोषित होने से बचाने के लिए अन्य खातों से लोन की राशि निकालकर किस्तें जमा कराई गईं, ताकि बैंक मुख्यालय को अनियमितता की भनक न लग सके.
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
नगर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल, अजय कुमार (तत्कालीन प्रबंधक), सुशील कुमार गौतम (तत्कालीन सहायक कैशियर) सहित खाताधारक सुमित्रा पाल, संजना सिंह, राज प्रताप सिंह, जय प्रताप सिंह, फूल मोहम्मद, राघव राम, शिवाकांत वर्मा, रितेंद्र पाल, गीता देवी वर्मा, दुष्यंत प्रताप सिंह, मोहम्मद असलम और प्रतीक कुमार सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है.
खाते में कथित तौर पर 31 लाख रुपये का लोन चढ़ाया
बहलोलपुर निवासी शिवेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने मकान के लिए 9 लाख रुपये का होम लोन लिया था और नियमित किस्तें जमा कर रहे थे. कुछ समय बाद जब वे किस्त जमा करने पहुंचे तो पता चला कि उनके खाते में कथित तौर पर 31 लाख रुपये का लोन चढ़ा दिया गया है. शिकायत करने पर इसे “गलती” बताया गया, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी हुई कि इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की गई है. शिवेंद्र दुबे का आरोप है कि 9 लाख के लोन को 3 लाख दिखाकर शेष राशि का गबन कर लिया गया और न्याय की मांग करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई.
क्राइम इंस्पेक्टर सभाजीत सिंह को सौंपी जांच
इस पूरे मामले की प्राथमिकी नगर कोतवाली गोंडा मैं दर्ज कर ली गई है और जांच क्राइम इंस्पेक्टर सभाजीत सिंह को सौंपी गई है, जिन्होंने छानबीन शुरू कर दी है. गौरतलब है कि पहले ही 21 करोड़ रुपये के फर्जी लोन और घोटाले को लेकर 16 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जबकि अब इसी शाखा से जुड़ा एक और मुकदमा तत्कालीन शाखा प्रबंधक और बैंक के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज होने से हड़कंप मच गया है. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि और नाम सामने आते हैं तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा.
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Source: IOCL




























