उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में बीती 24 जून को घाघरा नदी के किनारे बांध की मरम्मत कर रहे मजदूर भानू प्रताप पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. परिजन उसका इलाज लखनऊ में करा रहे थे. इलाके दौरान उसकी मौत हो गयी, जिसके बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है.

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परिजनों की मांग है कि उनकी आर्थिक क्षति पूर्ती के साथ ही उस स्थान को जहां मगरमच्छ ने हमला किया था उसे डेंजर जोन घोषित किया जाए. परिजनों के मुताबिक जिस जगह पर मगरमच्छ ने हमला किया था, वहां इंफेक्शनन फैल चुका था. जिस कारण मजदूर की मौत हो गयी.

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क्या था पूरा घटनाक्रम ?

मृतक मजदूर भानु प्रताप के साले लक्ष्मण चौहान ने बताया कि उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के सलौनी मोहम्मदपुर में बीते 24 जून को घाघरा नदी के किनारे बांध बनाने के लिए भानु प्रताप मजदूरी करने गया था. वहां मगरमच्छ ने उन पर हमला किया था,  उनके पैर पर को खींचकर नदी में लेकर जा रहा था. चीख-पुकार सुन अन्य साथियों ने लोहे के रॉड से मगरमच्छ पर हमला कर  बहनोई को बचा लिया था.

परिवार को आर्थिक मुआवजे की मांग 

उसके बाद से इलाज चल रहा था, पहले गोंडा के निजी अस्पताल में इलाज चलवा रहे थे फिर अचानक उनको असहनीय दर्द होने लगा. जिसके बाद उन्हें लखनऊ लेकर गए. वहां पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं गरीब हैं उन्होंने कई रिश्तेदारों से कर्ज लिया अपने जेवर भी बेच दिए. यही नहीं  दुधारू जानवर को भी बेच दिया.  प्रशासन से मांग करते हैं कि मुआवजा दिया जाए और उनके परिवार को एक नौकरी दी जाए जिससे परिवार का भरण पोषण होता रहे.

उधर प्रशासन ने इस मामले में सरकार योजना के तहत हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. साथ ही वन विभाग ने नदी के किनारे अधिक सतर्कता बरतने की अपील ग्रामीणों से की है.

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