गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र के सर्वोदय नगर में बारिश के बाद हुए जलभराव ने एक मासूम की जान ले ली. घर के बाहर गली में भरे पानी में गिरने से तीन साल की मानवी की मौत हो गई. इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर जलभराव की समस्या का समय रहते समाधान किया गया होता तो इस हादसे को टाला जा सकता था.

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परिजनों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना के समय मानवी घर के बाहर गली में थी. बारिश के कारण गली में काफी पानी भरा हुआ था. बताया जा रहा है कि इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह पानी में गिर गई. जब तक आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हुई और उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है.

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जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं

इलाके के लोगों का कहना है कि सर्वोदय नगर में बारिश के दौरान हर साल घुटनों से ऊपर तक पानी भर जाता है. कई घरों में पानी कमरों तक पहुंच जाता है और लोगों को घंटों बाल्टियों से पानी निकालना पड़ता है. उनका आरोप है कि जल निकासी की समस्या को लेकर नगर निगम और संबंधित विभागों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला.

मामले में नगर निगम ने क्या कहा?

स्थानीय पार्षद का कहना है कि एनएच-24 बनने के दौरान इलाके के नाले का प्रवाह प्रभावित हुआ, जिसके बाद से जलभराव की समस्या लगातार बढ़ी है. उनका आरोप है कि इस संबंध में नगर निगम और आवास विकास को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया. वहीं नगर निगम की ओर से यह तर्क दिया गया कि अत्यधिक बारिश के कारण कई वार्ड जलमग्न हुए हैं और पानी निकालने के लिए मोटर भी लगाई गई थी.

चार साल पहले भी हुई थी एक बच्चे की मौत

स्थानीय लोगों ने एबीपी न्यूज को बताया कि, करीब चार साल पहले भी इसी इलाके में बारिश के दौरान 10 साल के एक बच्चे की पानी में डूबने से मौत हो गई थी. उस घटना के बाद उम्मीद थी कि जल निकासी की व्यवस्था सुधारी जाएगी, लेकिन हालात नहीं बदले. अब तीन साल की मानवी की मौत ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस घटना के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं. अगर इलाके में वर्षों से जलभराव की समस्या थी तो उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? नालों की सफाई और जल निकासी की जिम्मेदारी किस विभाग की है? नगर निगम, आवास विकास और जनप्रतिनिधियों में आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी? पहले भी डूबने से मौतें हो चुकी थीं, फिर उनसे सबक क्यों नहीं लिया गया?

बारिश हर साल होती है, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि जलभराव वाले इलाकों की पहले से पहचान की जाए, नालों की नियमित सफाई हो, जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए, संवेदनशील जगहों पर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और भारी बारिश के दौरान प्रशासन की विशेष निगरानी रहे. क्योंकि अगर व्यवस्था नहीं बदली, तो अगली बारिश में फिर किसी और परिवार को ऐसी अपूरणीय क्षति झेलनी पड़ सकती है.

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