2008 में चोरी हुई हथिनी 17 साल बाद गुजरात में मिली! गाजियाबाद के शख्स ने कोर्ट में लगाई गुहार
Ghaziabad News In Hindi: गयूर के मुताबिक साल 2008 में उसे चोट लगी और वह कोमा में चला गया. इसी दौरान हथनी की देखभाल के लिए लगाए गए दो शख्स उसे लेकर जम्मू कश्मीर चले गए.

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले एक शख्स ने साल 2000 में बिहार के सोनपुर मेले से 13 साल की और साढ़े 7 फिट ऊंची एक हथिनी खरीदी थी. इस हथनी की देखभाल के लिए दो शख्स लगाए गए थे. आरोप है कि वह दोनों शख्स हथनी को चुराकर ले गए. कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ. अब पुलिस जांच से पता लगाया है कि उसकी हथनी गुजरात के राधे कृष्ण टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट मोता खाबड़ी जामनगर गुजरात में है. कोर्ट में रिलीज के लिए अर्जी दाखिल की गई है.
मालिक ने हथिनी को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट का सहारा लिया है, मामला वाइल्ड लाइफ से भी जुड़ा है और कई तकनीकी पहलू भी हैं, जिन पर गौर करने के बाद ही कोर्ट कोई फैसला देगा.
क्या है पूरा मामला ?
जाकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के गांव फरुखनगर के रहने वाले गयूर ने बिहार के सोनपुर मेले से साल 2000 में नवंबर 15 में एक हथनी खरीदी थी. उस दौरान गयूर ने ढाई लाख रूपए देकर यह हथनी खरीदी थी. हथनी साढ़े 7 फीट ऊंची थी. गयूर ने बताया कि उसके पूर्वज बहादुर शाह जफर के समय से हाथियों की देखभाल करते थे. इस परंपरा को आगे बढ़ते हुए उसने भी बिहार से एक हथनी खरीदी थी.
गणतंत्र दिवस की परेड में भी हुई थी शामिल
हथनी की देखभाल उसने ऐसी करी कि वह इलाके की आकर्षक बन गई थी. एक बार तो 26 जनवरी की परेड में भी उसने प्रथम अवार्ड जीता था. गयूर के मुताबिक साल 2008 में उसे चोट लगी और वह कोमा में चला गया. इसी दौरान हथनी की देखभाल के लिए लगाए गए दो शख्स उसे लेकर जम्मू कश्मीर चले गए.
इंटरनेट पर उसने जो अपनी हथनी की तस्वीर देखी तो जम्मू कश्मीर गया लेकिन वहां उसे हथनी नहीं दी गई. वापस आने के बाद उसने अदालत के माध्यम से मुकदमा दर्ज करवाया अब उसे पता चला है कि उसकी हथनी गुजरात में है. पीड़ित का कहना है कि इस केस के चलते उसका अपना घर बार भी बिक गया है.
एक जनवरी 2008 को हुई थी चोरी
गयूर के वकील दिलशाद चौधरी ने बताया कि यह हथनी गयूर के घर से 1 जनवरी 2008 को चोरी हो गई थी चोरी का आरोप गयूर के घर में हथनी का देखभाल करने वाले दो लोगों लक्षमण और लक्की पर आरोप था. इसके बाद पुलिस ने जब गयूर की सुनवाई नहीं करी तो गयूर ने खुद अपनी हथनी की तलाश शुरू करी. इंटरनेट पर उनको यह हथनी जम्मू कश्मीर में मिली. जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो इन्होंने कोर्ट में अपना मुकदमा दर्ज करवाया. दोनों लक्ष्मण और लकी पर जो नौकर थे. कोर्ट के आदेश पर हुए मुकदमे दर्ज क बाद थाना टीला मोड़ पुलिस ने अपनी तलाश शुरू की.
वकील के मुताबिक पुलिस ने उनको बताया गया कि उनकी हथनी गुजरात में है. इसके बाद जब हमने लोअर कोर्ट में रिलीज के लिए आर्डर डाल तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह हथिनी गुजरात भेजी गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते रिलीज का ऑर्डर लोअर कोर्ट से निरस्त हो गया. वकील के मुताबिक सेशन कोर्ट में रिलीज की अर्जी लगाई है और हमें उम्मीद है कि हथनी मिल जाएगी.
मिली जानकारी के मुताबिक जब हथनी जम्मू कश्मीर में थी तब वहां पर वाइल्डलाइफ से जुड़े लोगों ने अच्छे रख रखाव ना होने की शिकायत की थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एक हाई पावर कमेटी गठित है जिसे हथनी को गुजरात भेजे जाने का फैसला दिया था.
























