गाजियाबाद से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने इंसानियत और व्यवस्था, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़क पर खून से लथपथ एक युवक काफी देर तक तड़पता रहा, लेकिन न मौके पर मौजूद लोगों ने उसकी मदद की और न ही पास मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत आगे आए.

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बाद में जब उसे अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई.

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परिवार का सहारा था राजकुमार

मृतक की पहचान बिहार निवासी राजकुमार के रूप में हुई है, जो गाजियाबाद के गुलधर इलाके में रहता था. परिवार की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी. उसके पिता वर्षों से कोमा में हैं, छोटा भाई दिव्यांग है, दो छोटे बच्चे हैं और पत्नी गर्भवती है. रविवार को वह काम की तलाश में घर से निकला था, लेकिन शाम तक परिवार का सहारा हमेशा के लिए छिन गया.

विवाद के बाद पुलिस चौकी पहुंचा, फिर हुआ हादसा

खबर है कि रास्ते में एक ऑटो चालक से किराए को लेकर उसका विवाद हो गया. शिकायत करने के लिए वह सेक्टर-23 स्थित मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के पिंक पुलिस बूथ पहुंचा. आरोप है कि उसकी बात नहीं सुनी गई. इसके बाद उसने गुस्से में चौकी के शीशे पर हाथ मार दिया, जिससे कांच उसकी हथेली और कलाई में धंस गया. वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और लगातार खून बहता रहा.

लोग बना रहे थे वीडियो, पुलिसकर्मी भी बूथ से नहीं निकले

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घायल राजकुमार काफी देर तक सड़क पर तड़पता रहा. आसपास मौजूद लोग वीडियो बनाते रहे, जबकि परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मी भी बूथ के अंदर से देखते रहे और तत्काल मदद के लिए बाहर नहीं आए, बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके.

इस मामले में एसीपी उपासना पांडे का कहना है कि शुरुआती जांच में मृतक के शराब के नशे में होने की बात सामने आई है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है. हालांकि इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि कोई व्यक्ति नशे में भी था, तो क्या उसे समय पर प्राथमिक उपचार और पुलिस सहायता का अधिकार नहीं था? क्या घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सकता था? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच से ही सामने आएंगे, जबकि राजकुमार का परिवार इंसाफ और जवाबदेही की उम्मीद में है.

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