नोएडा के इंदिरा गांधी कला केंद्र में आयोजित 'सविता प्रभा सांस्कृतिक महोत्सव' में नन्हे और युवा कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सजीव कर दिया.
महोत्सव में Gen Z और Gen Alpha ने अपना जलवा बिखेर कर यह साबित कर दिया है कि रील्स ही नहीं बल्कि कथक में भी अव्वल हैं. ऐसे समय में, जब Gen Z और Gen Alpha विभिन्न कारणों से सुर्खियों में हैं. इन पीढ़ियों के प्रतिभाशाली बच्चों ने अपनी कला-साधना से एक अलग और प्रेरणादायक पहचान प्रस्तुत की.
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भारत की प्रतिष्ठित संगीत शिक्षण संस्था प्रयाग संगीत समिति के शताब्दी वर्ष के मौके पर भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन हुआ. यहां लगभग 100 Gen Z और Gen Alpha कथक साधकों ने अपनी साधना, अनुशासन और उत्कृष्ट कला-प्रदर्शन से यह सिद्ध कर दिया कि नई पीढ़ी न केवल आधुनिक तकनीक से जुड़ी है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की मजबूत संवाहक भी है.
अनुशासन और कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रदर्शन
श्री कृष्ण प्रभा कला केंद्र, कथक केंद्र नोएडा और सविता प्रभा प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में अलग-अलग आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने कथक की पारंपरिक बंदिशों, भाव, ताल और लय की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. नन्हे कलाकारों से लेकर युवा साधकों तक सभी ने अपनी साधना, अनुशासन और कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया.
इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि नई पीढ़ी, Gen Z और Gen Alpha, केवल इंस्टाग्राम और फेस्बुल में ही नहीं उलझी है बल्कि भारतीय शास्त्रीय कला एवं संस्कृति से भी गहराई से जुड़ रही है और उसे नई ऊर्जा और समकालीन दृष्टि के साथ आगे बढ़ा रही है.
आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे सांस्कृतिक विरासत- विष्णुप्रिया पांडेय
इस अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद् एवं कथक गुरु डॉ. विष्णुप्रिया पांडेय द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘कल्पतरु’ का लोकार्पण भी किया गया. इसके साथ ही कथक एवं शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों और कलाकारों को सम्मानित किया गया.
उन्होंने कहा, "प्रयाग संगीत समिति का शताब्दी वर्ष भारतीय संगीत और नृत्य की गौरवशाली परंपरा का उत्सव है. ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी में भारतीय शास्त्रीय कलाओं के प्रति रुचि, संवेदनशीलता और समर्पण की भावना विकसित करना तथा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सशक्त रूप से पहुंचाना है."
साहित्य, संगीत और नृत्य के इस अनूठे संगम में 400 से अधिक कला एवं साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की. कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने युवा कलाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए भारतीय शास्त्रीय कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों को समय की जरूरत बताया.
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