उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है. पूर्व डीजीपी ने मुजफ्फरनगर दंगे से जुड़े 22 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लिए जाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है. उन्होंने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल उठाते हुए आरोपियों से केस वापस लिए जाने पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि सरकार दंगाइयों पर इतनी मेहरबान क्यों हैं? 

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पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने एक ख़बर का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा, जिसमें मुज़फ़्फ़रनगर दंगा मामले में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल समेत 22 आरोपियों पर से मुकदमा वापस लिए जाने का दावा किया गया है. 

यूपी का जीरो टॉलरेंस नीति पर उठाए सवाल

सुलखान सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा- मुजफ़्फ़रनगर दंगे के 22 अभियुक्तों से केस वापस लेने का आदेश, वाह रे जीरो टॉलरेंस टू क्राइम, वाह रे दंगा मुक्त प्रदेश. उन्होंने कहा कि याद है न, अभी कुछ दिन पहले कानपुर दंगे के आरोपियों के केस भी वापस लिए गए थे. 

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ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार दंगों के आरोपियों पर इतनी मेहरबान क्यों है? पूर्व DGP ने कहा कि यह अच्छी बात नहीं है. समाज और देश के लिए घातक है. उनके इस बयान के बाद मुजफ्फरनगर दंगा मामले में सरकार के फैसले को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है.

जानें- क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, मंत्री कपिलदेव अग्रवाल, पूर्व मंत्री सुरेश राणा समेत कई नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की सरकार की पहल के बाद कोर्ट ने अभियोजन की अर्जी मंजूर की है. यह मामला नगला मडोर में हुई महापंचायत से जुड़ा था, जहां आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा और भाषणों के जरिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप लगाए गए थे.