उत्तराखंड में माध्यमिक शिक्षा प्रवक्ता भर्ती परीक्षा की तारीखों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है. पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरा है. उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रावत का कहना है कि सरकार और आयोग की लापरवाही से हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है.

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युवाओं के सामने ‘इधर कुआं, उधर खाई’ जैसी स्थिति

हरीश रावत ने कहा कि अक्सर सरकारें जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज कर देती हैं और यही इस मामले में भी दिख रहा है. उनका कहना है कि भर्ती परीक्षा की तारीखें ऐसी रखी गई हैं कि युवाओं के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है.

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उन्होंने बताया कि कई अभ्यर्थी लंबे समय से तैयारी कर रहे थे और अब उन्हें मजबूरी में एक परीक्षा छोड़नी पड़ सकती है. इससे उनके करियर पर सीधा असर पड़ेगा.

रावत के मुताबिक, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने प्रवक्ता भर्ती परीक्षा का कैलेंडर ऐसे समय पर जारी किया है, जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं भी होने वाली हैं.

चूंकि यूपी की परीक्षाओं का शेड्यूल पहले से घोषित था, इसलिए उत्तराखंड के ज्यादातर अभ्यर्थियों ने वहां आवेदन कर रखा है और उसी हिसाब से तैयारी भी कर रहे हैं. अब दोनों परीक्षाएं एक ही समय पर होने से युवाओं को एक विकल्प छोड़ना पड़ रहा है, जो उनके भविष्य के साथ अन्याय जैसा है.

अभ्यर्थियों की मांग, तारीखों में बदलाव हो

करीब 400 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने व्यक्तिगत तौर पर और ईमेल के जरिए आयोग से अपनी समस्या साझा की है. उनकी साफ मांग है कि परीक्षा की तारीखों में थोड़ा बदलाव कर दिया जाए ताकि वे दोनों परीक्षाओं में शामिल हो सकें.

रावत ने तंज कसते हुए कहा कि आयोग ने पहले तो इस पर विचार करने की बात कही, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है. इससे युवाओं में भ्रम और मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है.

लंबी भर्ती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

सिर्फ तारीखों का टकराव ही नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की अवधि पर भी सवाल उठ रहे हैं. रावत का कहना है कि जिन परीक्षाओं को एक-दो महीने में पूरा किया जा सकता है, उन्हें चार-पांच महीने तक खींचा जा रहा है. उन्होंने पूछा कि जब संसाधन उपलब्ध हैं, तो फिर प्रक्रिया को इतना लंबा क्यों बनाया जा रहा है? इससे युवाओं का समय भी बर्बाद हो रहा है और वे दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं से भी वंचित हो रहे हैं.

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हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार का काम युवाओं के लिए मौके बढ़ाना है, न कि उनके रास्ते में रुकावटें पैदा करना. उन्होंने कहा कि अगर कुछ दिन आगे-पीछे करके हजारों युवाओं को राहत मिल सकती है, तो सरकार को तुरंत यह कदम उठाना चाहिए.

राजनीतिक गलियारों में इसे एक बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि रावत इस मुद्दे के जरिए युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं और सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.