Varanasi Flower Business: कोरोना काल में व्यापार प्रभावित हुआ है. महामारी की वजह से सबसे ज्यादा छोटा व्यापार करने वाले लोग परेशान हुए हैं. लेकिन, अब एक बार फिर लोगों का व्यवसाय पटरी पर लौटता हुआ नजर आ रहा है. सावन के महीने में ऐसा ही कुछ हाल काशी में फूल व्यवसायियों का है. फिलहाल, बदहाली के दिन गिन रहा फूल अब फिर से इतराता नजर आ रहा है. व्यापार में तीस प्रतिशत का उछाल है और फूल किसान के साथ व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं.
व्यवसाय पर एक नजरवाराणसी फूल व्यवसाय और फूल खेती का एक बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां फूलों का खूब उत्पादन होता है. लगभग दस हजार परिवार इस फूल की खेती और व्यवसाय से जुड़े हुए है. महिलाएं हों या पुरुष गंगा किनारे के लगभग दर्जन भर गांवों में फूलों की खेती होती है. यहां के फूल जब पैदा होते हैं तब मंडियों तक जाते हैं और पूरे पूर्वांचल में भेजे जाते हैं.
कोरोना ने किया नुकसानकोरोना की दूसरी लहर में मंदिर में भक्तों का जाना प्रतिबंधित हो गया था और आयोजन भी सीमित हो गए थे. लिहाजा, फूल व्यवसाय पर संकट मंडरा रहा था. आलम ये था कि फूल खेतों में ही बर्बाद हो गए. मंडी तक आने में भी दिक्कत थी. व्यवसाय और किसानी दोनों घाटे में चले गए थे.
सावन ने व्यवसाय को दी राहतसावन के माहीने में भक्तों की आवक और श्रद्धा ने फूलों और उसके व्यवसाय को राहत दी है. खास तौर पर मंदिरों में चढ़ने वाले फूल लोगों की आस्था प्रकट करते हैं. ऐसे में फूल व्यवसाय अब थोड़ा ऊपर नजर आ रहा है. फूल मंडी में भीड़ नजर आ रही है और देवालयों के बाहर लोग फूलों की खरीदारी करते नजर आ रहे हैं.
वाराणसी मौसमी फूलों का बड़ा केंद्र हैवाराणसी में मंडुआडीह, रोहनियां, रामनगर और इसके साथ ही जालहुपुर में फूलों की खेती होती है. महिलाओं का बड़ा तबका इससे जुड़ा है. फूल उपजाने से लेकर माला बनाने तक में महिलाओं का योगदान है. इसी फूल की खेती से महिलाओं के घर चलते हैं. व्यवसाय पटरी पर आने से अब एक बार फिर लोगों के चेहरे खिले हुए हैं.
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