उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां हाईटेक मोड में नज़र आ रही है. राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर तैयारियां कर रहे हैं. इन्हीं तैयारियों के बीच यूपी की सियासत में चर्चा का केन्द्र बना है- कमल साथी ऐप. यूपी में बीजेपी के कई विधायकों ने अपनी चुनावी नैय्या पार लगाने के लिए कमल साथी ऐप का सहारा लिया है. कमल साथी एक मोबाइल एप्लीकेशन है, जो कि चुनावी मैनेजमेंट का काम करती है.

Continues below advertisement

कमल साथी ऐप में बीजेपी विधायक को अपने विधानसभा की पूरी जानकारी एक क्लिक में मिल सकती है. इस ऐप में SIR के बाद और SIR के पहले की मतदाता सूची उपलब्ध है. विधायकों को सिर्फ मतदाता के नाम को लिखना है और पूरी जानकारी उनके ऐप में नज़र आएगी. हालाँकि यह एक आंतरिक एप्लीकेशन के तौर पर डेवलप किया गया है. आम लोगों के लिए ऐप किसी भी प्लेटफार्म पर उपलब्ध नहीं होगा, जब तक प्रधान एडमिन इसकी अनुमति ना प्रदान करे. विधायकों को एडमिन की तरफ से यूज़र आईडी पासवर्ड मुहैया कराया गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के OSD संजीव सिंह ने तैयार किया

कमल साथी एक AI आधारित ऐप बताया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक कमल साथी ऐप को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के OSD संजीव सिंह ने तैयार किया है. इस बात की पुष्टि बीजेपी के कई विधायकों ने की है. बीजेपी के कई विधायकों ने बताया कि संजीव सिंह के द्वारा ही उनके फोन में यह ऐप डाउनलोड कराया जा रहा है. बीजेपी विधायकों ने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री कार्यालय सीधे तौर पर इस ऐप के कामकाज की मॉनिटरिंग कर रहा है. बीजेपी विधायक के इन दावों के बाद ABP न्यूज़ ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के OSD संजीव सिंह से फोन पर बातचीत की. संजीव सिंह ने ABP न्यूज़ से बातचीत में कमल साथी ऐप की पुष्टि की.

Continues below advertisement

संजीव सिंह ने कहा कि ‘मैं साल 2009 से इस तरह के ऐप पर काम कर रहा हूं. यह एक आंतरिक चुनावी मैनेजमेंट का एप्लीकेशन है’. हालाँकि इसके अतिरिक्त उनकी तरफ से कोई अन्य जानकारी नहीं दी गई. यह सवाल पूछने पर कि अब तक कितने बीजेपी विधायकों ने कमल साथी ऐप को डाउनलोड किया है? संजीव ने कहा कि ‘यह संख्या एक बार देखनी पड़ेगी’.

बीजेपी के एक विधायक ने अपने फोन में कमल साथी ऐप दिखाया. नाम ना बताने की शर्त पर बीजेपी विधायक ने कहा कि यह ऐप हमारे लिए गेंमचेंजर होने वाला है. जब बीजेपी विधायक से यह सवाल पूछा गया कि एक मोबाइल एप्लीकेशन आपके लिए कैसे गेमचेंजर हो सकता है? तो बीजेपी विधायक ने ABP न्यूज़ को पूरा ऐप चलाकर दिखाया कि यह कैसे काम करता है? इस ऐप के माध्यम से बीजेपी विधायक अपने विधानसभा की पूरी मतदाता सूची देख सकते हैं. इसके अलावा पिछले SIR में किसके किसके नाम काटे गए हैं और किसके नए नाम जोड़े गए हैं, उनकी पूरी लिस्ट भी विधानसभा वार इस ऐप पर उपलब्ध है. इसके साथ ही Form 6 यानी नए मतदाता जोड़ने और Form 7 यानी नाम कटवाने वाला फॉर्म भी इसी ऐप के साथ जोड़ा गया है. यानी बीजेपी विधायक कमल साथी ऐप के माध्यम से Form 6 और Form 7 का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालाँकि यह ऐप उन्हें सीधे चुनाव आयोग की वेबसाइट की तरफ भेज देगा.

बीजेपी विधायक ने बताया कि इस ऐप में वो अपने कार्यकर्ताओं को जोड़ सकते हैं, जो बूथवार मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे. उनकी लाईव रिपोर्ट ऐप के डैशबोर्ड पर देखी जा सकती है. यानी संबंधित कार्यकर्ता कितनी देर पहले इस ऐप के माध्यम से सक्रिय था, यह जानकारी विधायक को सीधे मिल जाएगी. बीजेपी विधायक ने बताया कि कमल साथी ऐप के माध्यम से वो मतदाताओं के मोबाइल नंबर, उनके परिवार की जानकारी भी इस पर दर्ज कर सकते हैं. यही नहीं इस ऐप में कुछ कॉलम ऐसे भी दिए गए हैं, जिसमें मतदाताओं की विचारधारा और उनके रूझान को भी विधायक दर्ज करा सकते हैं. यानी चुनाव से पहले एक बड़ा डेटाबेस तैयार करने की मुहिम नज़र आ रही है. बीजेपी विधायक ने यह भी कहा कि कमल साथी 2027 में उनकी चुनावी सारथी साबित होगा.

बूथ वार जातियों के नाम भी लिखे जा रहे

कमल साथी ऐप में मतदाता सूची के सापेक्ष बूथ वार जातियों के नाम भी लिखे जा रहे हैं. यानी बीजेपी विधायक अगर पूरी मतदाता सूची का सत्यापन करने में सफल रहा तो वो यह जान सकता है कि उसकी विधानसभा में किस जाति के कितने मतदाता हैं? यही नहीं कई छोटी-छोटी जातियों के ऑप्शन को विधायक इस ऐप में सीधे जोड़ सकता है. कमल साथी ऐप में एक कॉलम प्रभावशाली मतदाता का भी दिया गया है. जिसमें विधायकों को अपनी विधानसभा के प्रभावशाली लोगों की जानकारी, व्यवसाय, मोबाइल नंबर और उनके झुकाव के बारे में लिखना होगा. कमल साथी एप्लीकेशन में डैशबोर्ड, सहायता केन्द्र, अनुमोदन और उपयोगकर्ता, संग्रहित डेटा जैसे कॉलम बनाए गए हैं. इसमें विधायकों को व्यवस्थापक का पद दिया गया है.

कुल मिलाकर बीजेपी विधायक अपनी विधानसभा का संपूर्ण डेटा इस एप्लीकेशन पर उपलब्ध कराएँगे, जिसकी सीधी मॉनिटरिंग यूपी सीएम के ओएसडी संजीव सिंह करेंगे. यह कहा जा सकता है कि एसआईआर के बाद की मतदाता सूची में किस जातीय समीकरण इकट्ठा करने का यह एक प्रभावी माध्यम हो सकता है.

हालाँकि एबीपी न्यूज़ ने जब कमल साथी एप्लीकेशन के बारे में यूपी बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछा, तो उन्हें इस ऐप की कोई ख़ास जानकारी नहीं थी. सूत्रों ने यह बताया कि यूपी बीजेपी के महत्त्वपूर्ण नीति निर्धारकों के सामने कमल साथी ऐप का प्रेजेंटेशन भी दिया गया था, जिसमें यूपी बीजेपी ने कई ख़ामियाँ बताकर स्वीकार करने से मना कर दिया है. सूत्रों ने बताया कि कमल साथी ऐप का प्रेज़ेंटेशन यूपी बीजेपी अध्यक्ष और यूपी बीजेपी संगठन महामंत्री के सामने भी हुआ था. एबीपी न्यूज़ ने यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और यूपी बीजेपी संगठन महामंत्री धर्मपाल का पक्ष जानने का प्रयास किया है, लेकिन ख़बर लिखे जाने तक दोनों की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अगर दोनों ही नेताओं की तरफ से कोई बयान सामने आता है, तो उसे ख़बर में शामिल किया जाएगा.

यूपी बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने एबीपी न्यूज़ से फोन पर बातचीत में कहा कि उन्हें अभी कमल साथी ऐप की जानकारी नहीं है, वो इसकी जानकारी हासिल कर जवाब दे पाएंगे. थोड़ी देर बाद जानकारी हासिल कर दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि ‘यह एक इंटरनल ऐप हो सकता है, यह पार्टी और सरकार का ऐप नहीं है’.

अब देखना होगा कि क्या बीजेपी के सभी विधायक कमल साथी एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं या फिर यह संख्या सीमित होगी? लेकिन एक बात तो साफ है कि साल 2027 के चुनावी डिक्शनरी में टेक्नोलॉजी, AI, ऐप आधारित चुनावी मैनजमेंट की एंट्री हो चुकी है. यह भले ही एक आंतरिक ऐप हो लेकिन सियासी तपिश उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में महसूस की जा सकती है. बीजेपी के कई विधायक इसे ख़ुशी-ख़ुशी डाउनलोड कर रहे हैं तो कई अभी कुछ सवालों के साथ असमंजस की स्थिति में नज़र आ रहे हैं.