पूरे देश और दुनिया भर में गुरुवार (28 मई) को बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है. बकरीद पर पूरे देश में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में एक गांव ऐसा है जहां बकरीद पर कुर्बानी नहीं की जाती है. यहां मेहदावल तहसील के मुसहरा गांव में बकरीद के एक दिन पहले पुलिस कुर्बानी के बकरे उठा ले जाती है. इन्हें बकरीद के बाद वापस किया जाता है. 

Continues below advertisement

ये परंपरा 2007 से चली आ रही है. संत कबीर नगर के इस गांव में कहानी कुछ अलग है. यहां हिंदू और मुस्लिम पक्ष में विवाद के चलते बकरीद पर कुर्बानी और होलिका दहन पर रोक है. गांव में दोनों पक्षों में यूं तो सबकुछ ठीक है पर बकरीद और होलिका को लेकर एक दूसरे से बनती नहीं है. 

आखिर क्या है विवाद का कारण?

Continues below advertisement

धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र के मुसहरा गांव में बकरीद पर कभी कुर्बानी नहीं की गई. यहां हमेशा रोक थी, लेकिन 2007 में पूर्व BSP विधायक ताबिश खां के कहने पर इस गांव में कुर्बानी कर दी गई. इसके बाद दो पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) में विवाद बढ़ गया. 

बात इतनी बढ़ गई कि गांव में लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ भी की गई. पुलिस ने इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया था. इसके बाद से यहां कुर्बानी नहीं होती और बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स और पीएसी तैनात की जाती है.      

पुलिस अधिकारियों ने की लोगों से बातचीत

जिलाधिकारी आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना द्वारा संयुक्त रूप से बकरीद के दृष्टिगत थाना धर्मसिंहवा के मुसहरा गांव में पीस कमेटी बैठाई और लोगों से बातचीत की. शांति समिति की बैठक के दौरान डीएम और एसपी द्वारा लोगों से शांति और भाईचारे की अपील की गई. त्योहार के दौरान गड़बड़ी पैदा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गई है. 

माहौल बिगाड़ने वालों पर होगी कार्रवाई- DM 

जिलाधिकारी आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने पैदल गश्त कर लोगों से संवाद किया और कहा कि किसी भी प्रकार से व्यवस्था में खलल डालने वाले लोगों पर पुलिस और प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा. उन्होंने पीस कमेटी को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षा और शांति व्यवस्था में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी.