कोरोना महामारी ने पूरे देश को प्रभावित किया है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भी इससे अछूते नहीं हैं. एबीपी गंगा के मंच पर 'कोरोना काल का कर्मयोग' e-कॉन्क्लेव में राजनेताओं से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी बात रखी साथ ही ये भी बताया कि कोरोना के निपटने के लिए किस तरह के प्रयास किए गए हैं.
बिगड़ गए हालात उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने e-कॉन्क्लेव में कहा कि कोरोना के दौरान पूरे देश की सेहत बिगाड़ दी गई. दिल्ली को कोरोना कैपिटल के रूप में जाना जाने लगा. ऐसे में उत्तराखंड भी अपवाद नहीं है. यहां भी देहरादून समेत सभी शहरों में हालात बिगड़ गए.
लोग कोरोना कर्फ्यू में बाहर निकलने को मजबूर हुए हरीश रावत ने कहा कि मैंने सरकार को सुझाव दिया कि लोगों के खाते में एक हजार रुपये डाल दीजिए. इससे लोग सैनिटाइजर, मास्क जैसी चीजें खरीद सकेंगे. लेकिन, सरकार ने बात नहीं सुनी. लोगों के पास पैसा नहीं था इस वजह से वो कोरोना कर्फ्यू के दौरान बाहर निकलने को मजबूर हुए.
कुंभ को लेकर नहीं की गई तैयारी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने e-कॉन्क्लेव में कहा कि कुंभ को जनवरी से ही शुरू कर देना चाहिए था. मकर संक्रांति से अगर ये शुरू हो गया होता तो दूसरी लहर के दौरान सख्ती से लोगों को रोका जा सकता था. लेकिन सरकार ने कुंभ को लेकर कोई तैयारी नहीं की.
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