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उत्तराखंड: दून अस्पताल में 'दवा घोटाला', फार्मेसी में स्टॉक फुल, फिर भी बाहर से खरीदने को मजबूर मरीज

Uttarakhand News: उत्तराखंड के दून अस्पताल में बड़ा दवा फर्जीवाड़ा सामने आया है. डॉक्टर मरीजों को अस्पताल की फार्मेसी में दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद बाहर के निजी स्टोर से खरीदने को कह रहे थे.

उत्तराखंड के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां अस्पताल की अपनी फार्मेसी में दवाइयां उपलब्ध होने के बावजूद, डॉक्टर मरीजों को बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए पर्चे लिख रहे थे. इस खुलासे के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

इस पूरे 'दवा घोटाले' का खुलासा तब हुआ जब मरीजों द्वारा जमा किए गए चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) दावों के बिलों की बारीकी से जांच की गई. मिलान करने पर यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन दवाओं के बिल मरीजों ने बाहर की दुकानों से खरीदकर लगाए थे, ठीक उसी दौरान वे दवाएं अस्पताल की सरकारी फार्मेसी के स्टॉक में पर्याप्त मात्रा में दर्ज थीं. यानी, जो दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलनी चाहिए थीं, उनके लिए उन्हें बेवजह अपनी जेब ढीली करनी पड़ी.

फार्मेसी में 650 से ज्यादा दवाएं मौजूद

अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में दून अस्पताल की फार्मेसी में 650 से अधिक प्रकार की दवाइयां नियमित रूप से उपलब्ध हैं. इतने बड़े स्टॉक के बावजूद गरीब और असहाय मरीजों को बाहर का रास्ता दिखाना सीधे तौर पर उन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना है.

चिकित्सा अधीक्षक (MS) ने दिखाई सख्ती

मामले की गंभीरता को देखते हुए दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने स्थिति को सुधारने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं.

  • स्टॉक की दवाएं ही लिखें: सभी विभागाध्यक्षों (HoD) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को केवल वही दवाएं लिखी जाएं जो अस्पताल की फार्मेसी में उपलब्ध हों.
  • जन औषधि केंद्र का विकल्प: यदि कोई दवा किसी कारणवश फार्मेसी में उपलब्ध नहीं है, तो मरीजों को अस्पताल परिसर में ही स्थित 'प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र' भेजा जाए ताकि उन्हें किफायती दाम पर दवा मिल सके.

पहले भी अनसुने किए गए हैं आदेश

डॉ. बिष्ट ने खुद यह स्वीकार किया है कि इस संबंध में पहले भी कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन चिकित्सकों ने उनका पालन नहीं किया. हालांकि, इस बार प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि दोबारा ऐसी शिकायत मिली, तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही दवा लिखने और स्टॉक की निगरानी व्यवस्था को भी पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पहले भी आदेशों को अनसुना किया जा चुका है, तो प्रशासन की यह नई चेतावनी जमीन पर कितनी असरदार साबित होगी.

आलोक सेमवाल उत्तराखंड के देहरादून की खबरों पर नजर रखते हैं. एबीपी लाइव के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन BA hons मास कम्यूनिकेशन HNB गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की हैं.

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