झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 21 दिन से छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में धांधली को लेकर छात्रों में आक्रोश है. इस बीच जौनपुर से पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने सरकार को सुझाव दिए हैं. 

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पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेट्फ़ार्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "झारखंड लोक सेवा आयोग में चल रहे धरना प्रदर्शन को लेकर छात्रों के न्याय हेतु झारखंड के राज्यपाल व झारखंड सरकार मेरा को एक सुझाव है."

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धनंजय सिंह ने दिया ये सुझाव

धनंजय सिंह ने कहा, "भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) किसी भी राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के सभी या किन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए सहमत हो सकता है, इसके लिए राज्यपाल द्वारा औपचारिक अनुरोध और भारत के राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होती है."

उन्होंने आगे लिखा, "वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315(4) के तहत‌- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को राज्य सरकार की विशिष्ट प्रशासनिक या भर्ती संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी सेवाएं बढ़ाने का अधिकार भी है.

यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि यदि किसी राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) को कामकाज से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं या उसे विशेष केंद्रीय विशेषज्ञता की आवश्यकता है तो ऐसी परिस्थितियों पर राज्य का प्रशासनिक तंत्र ठप न हो जाए इसके लिए राज्य सरकार व गवर्नर संघ लोक सेवा आयोग की मदद ले सकते हैं.

उन्होंने आग संघ लोक सेवा आयोग ( UPSC ) झारखंड लोक सेवा आयोग ( JPSC ) की परिक्षा में समय की अनियमित्ता व पेपर लीक जैसे संगीन मामलों पर लगाम लगाएगी और राज्य सरकार के द्वारा JPSC के लिए बनाई स्थानीय नीति व 75% स्थानीय युवाओं के चयन के नियमों (आरक्षण नीतियों) का पूरी तरह पालन करेगी. उन्होंने आखिर में कहा, "इस सुझाव से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रुकेगा और संदिग्ध अधिकारियों पर चल रही कार्यवाहियों के दौरान‌ भी परिक्षा निष्पक्षता के साथ तय समय पर होती रहेंगी."

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