देहरादून के पॉश इलाके राजपुर रोड पर हुए सनसनीखेज विक्रम शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने अब अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. इस मामले में फरार चल रहे तीन शूटरों और साजिश में शामिल उनके तीन अन्य साथियों के खिलाफ पुलिस ने अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) हासिल कर लिया है. पुलिस की टीमें अब इन बदमाशों की गर्दन तक पहुँचने के लिए तीन राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं.
इस मामले में फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस कप्तान के निर्देश पर 15 अनुभवी पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम गठित की गई है. यह टीम फिलहाल झारखंड, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में इन बदमाशों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है.
इन आरोपियों के खिलाफ NBW जारी
जानकारी के मुताबिक, जिन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी हुए हैं, उनके नाम आशुतोष, विशाल और आकाश बताये गए हैं, जबकि इस वारदात में साजिशकर्ता व मददगार अंकित वर्मा, जितेंद्र कुमार और सारिका एंटरप्राइजेज (जमशेदपुर) का प्रोपराइटर यशराज बताये गए हैँ .
जेल की सलाखों के पीछे बुना गया था 'डेथ वारंट'
पुलिस की अब तक की तफ्तीश में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि विक्रम शर्मा की हत्या की पटकथा करीब छह महीने पहले जमशेदपुर (झारखंड) जेल के भीतर ही लिख दी गई थी. जेल में बंद कुछ सफेदपोशों और गैंगस्टरों ने मिलकर इस पूरी वारदात की प्लानिंग की थी.
शूटरों को देहरादून भेजने से लेकर उनके ठहरने, रेकी करने, वाहन उपलब्ध कराने और फिर हत्या के बाद सुरक्षित निकालने के लिए एक मजबूत स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था. इस नेटवर्क ने शूटरों को न केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया, बल्कि मोटी रकम (पेमेंट) का भी इंतजाम किया.
लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले दो पहले ही सलाखों के पीछे
डालनवाला कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक संतोष सिंह कुंवर ने बताया कि पुलिस इस मामले में पहले ही दो महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ चुकी है. शूटरों को ठिकाना और मदद मुहैया कराने वाले अक्षत ठाकुर और राजकुमार (दोनों निवासी जमशेदपुर) को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. अब बारी मुख्य शूटरों और मास्टरमाइंड की है.
क्या था पूरा मामला?
झारखंड का कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा, जिस पर हत्या, रंगदारी और जानलेवा हमले जैसे दर्जनों मुकदमे दर्ज थे, पिछले कुछ समय से देहरादून में रह रहा था. 8 साल पहले उसे जमशेदपुर पुलिस ने यहीं से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद वह जमानत पर बाहर आया था.
13 फरवरी की वो खूनी दोपहर
बीती 13 फरवरी को जब विक्रम शर्मा राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में अपनी जिम से वर्कआउट कर बाहर निकला, तभी घात लगाकर बैठे शूटरों ने उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं. दिनदहाड़े हुई इस वारदात से पूरा शहर दहल गया था. पुलिस शुरू से ही इसे दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई यानी 'गैंगवार' मानकर चल रही थी.
